‘हताशा’ टिप्पणी पर सियासी तूफान, विपक्ष ने मोदी को याद दिलाई PM पद की मर्यादा

नई दिल्ली 
संसद के शीतकालीन सत्र में सदन से बाहर ही पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए बयान पर हंगामा शुरू हो गया है। पीएम मोदी ने सदन में जाने से पहले मीडिया से बात की और विपक्ष से संवाद की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने बिहार चुनाव के नतीजों की बात करते हुए हार की हताशा वाला तंज कस दिया था। पीएम मोदी ने कहा था कि मैं अपील करूंगा कि हार की हताशा से बाहर निकलकर संसद में कामकाज करने दिया जाए। उनका कहना था कि विपक्ष को हार की हताशा से उबरते हुए संसद में चर्चा करनी चाहिए और महत्वपूर्ण विषयों पर बात हो। इसे लेकर विपक्ष पूरी तरह हमलावर है।
 
आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि पीएम मोदी खुद किस हताशा में हैं। उन्होंने कहा, 'पीएम ने यदि इस तरह बोला है कि विपक्ष हार की हताशा में है तो फिर वे किस हताशा में हैं। आप के अंदर कौन सी हताशा है। चुनाव मौलिक मुद्दों पर ना लड़कर कट्टा, भैंस और मुजरा जैसी बातें कहीं। क्या यह प्राइम मिनिस्टर की गरिमा है।' यही नहीं केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका वाड्रा ने भी पीएम मोदी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दे उठाना कब से ड्रामा करना हो गया। उन्होंने कहा कि कई गंभीर मसले हैं। चुनाव की स्थिति, SIR और पलूशन बड़े मुद्दे हैं। इन मसलों पर बात होनी चाहिए। आखिर संसद किसलिए होती है। मुद्दे उठाना ड्रामा तो नहीं है। ड्रामा यह है कि चर्चा ही नहीं करने दिया जाता। लोकतंत्र की हद में रहकर जनता के मसले उठाना तो कोई ड्रामा नहीं है।

कांग्रेस की ही सांसद नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि आखिर कौन हमें समझा रहा है। जो सबसे बड़े ड्रामा मास्टर हैं। हमें उनसे सीखना है कि ड्रामा कैसे करना है और कब करना है। यह हमें नहीं आता। कपड़े बदलकर और कैमरे का ऐंगल बदलकर कैसे ड्रामा किया जाता है, हमें यह सीखना होगा। ऐसा लग रहा है कि विश्व गुरु अब मानसिक गुरु भी बन गए हैं।

रेणुका चौधरी ने कहा कि हम लोग संसद में SIR का मसला जरूर उठाएंगे। हम लोग बहुत मजबूत हैं और किसी भी तरह की हताशा में नहीं हैं। सपा सांसद रामगोपाल यादव, अवधेश कुमार आदि ने भी संसद में SIR का मुद्दा उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक SIR पर बात नहीं हो जाती, हम किसी और मसले पर बात ही नहीं करेंगे।

 

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