चार पीढ़ियों की शहादत और सेवा की कहानी, अब सरताज सिंह ने थामा लेफ्टिनेंट का पद

नई दिल्ली 
सेना में अफसर बनना हर युवा का सपना होता है। हालांकि यह सपना पूरा करने के लिए कठिन एसएसबी इंटरव्यू से गुजरना पड़ता है। शिवशनिवार को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकैडमी (IMA) की पासिंग आउट परेड थी। इसमें 525 नए अधिकारियों को कमीशन कर दिया गया है। इसमें एक ऐसे सिख कैडेट भी शामिल हैं जिनके परिवार में चार पीढ़ियों से सैन्य अधिकारी की वर्दी बनी ही रही है।
 
लेफ्टिनेंट सरताज सिंह के पूर्वज 1897 से ही सेना में रहे हैं। शनिवार को वह 20 जाट रेजिमेंट में कमीशन हो गए हैं। वहीं उनके पिता ब्रिगेडियर उपिंदर पाल सिंह भी इसी रेजिमेंट में अधिकारी थे। आईएमए से मिली जानकारी के मुताबिक उनके ही पूर्वज सिपाई किरपाल सिंह 1897 में 36 सिख रेजमेंट का हिस्सा थे और वह अफगान अभियान में शामिल हुए थे।

इसके बाद लेफ्टिनेंट सरताज सिंह के पर दादा सुबेदार अजमेर सिंह सेना का हिस्सा थे। उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध में ब्रिटेन की तरफ से युद्ध लड़ा और उन्हें ब्रिटिश इंडिया गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनके दादा ब्रिगेडियर हरवंत सिंह ने 1965 और 1971 के भारत-पाकि्तान युद्ध में हिस्सा लिया। इसके अलावा उनके चाचा कर्नल हरविंदर पाल सिंह भी 1999 में कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं।

मामा के परिवार में भी सेना के अधिकारी
लेफ्टिनेंट सरताज सिंह के पिता की तरफ ही नहीं बल्कि ननिहाल में भी कई सैन्य अधिकारी रह चुके हैं। इनमें कैप्टन हरभगत सिंह, कैप्टन गुरमेल सिंह, कर्नटल गुरसेवक सिंह और कर्नल इंदरजीत सिंह के नाम हैं। पहला विश्वयुद्ध हो या फिर दूसरा, उनके ननिहाल से कोई ना कोई इसमें शामिल जरूर हुआ। वहीं 1071 की लड़ाई में भी लेफ्टिनेंट के ननिहाल से सैन्य अधिकारी शामिल हुए थे।

आईएमए से पासआउट लेफ्टिनेंट हरमनप्रीत सिंह रीन का भी परिवार भारतीय सेना की सेवा करता रहा है। उनके पर दादा ने सिख रेजिमेंट जॉइ किया था। इसके बाद उनके दादा और दो भाइयों ने 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में हिस्ला लिया। इनमें से कैप्टन उजागर सिंह को सेना मेडल मिला था। हरमनप्रीत के पिता हरमीत सिंह मराठा लाइट इन्फ्रैंट्री में कार्यरत हैं।

 

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