देश में आजादी के बाद पहली बार, मुस्लिम मंत्री के बिना भारत सरकार; पर 5 अल्पसंख्यक मंत्रियों को प्रभार

नई दिल्ली

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद के तौर पर लगातार तीसरी बार शपथ लेकर एक रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इसके साथ ही देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू की बराबरी कर ली है। यही नहीं उनकी इस तीसरी सरकार में एक और तथ्य की खूब चर्चा हो रही है। वह यह कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब केंद्र सरकार में किसी मुस्लिम नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। आमतौर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी किसी मुस्लिम नेता को ही मिलती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी इस बार किरेन रिजिजू को मिली है, जो बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं।

यह भी एक तरह का रिकॉर्ड ही है कि देश में पहली बार किसी बौद्ध नेता को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। यही नहीं उनके साथ एक राज्यमंत्री के तौर पर केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन जिम्मेदारी संभालेंगे। वह खुद ईसाई धर्म से ताल्लुक रखते हैं। जॉर्ज कुरियन तो किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं। पहले भाजपा की सरकारों में भी किसी मुस्लिम नेता को ही अल्पसंख्यक मंत्रालय मिलता था, लेकिन यह सिलसिला 2022 में तब खत्म हुआ, जब मुख्तार अब्बास नकवी से इस्तीफा ले लिया गया। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था, जिसके चलते उन्हें मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा। उसके बाद यह विभाग स्मृति इरानी को दे दिया गया था।

स्मृति इरानी मूल रूप से हिंदू हैं, लेकिन उनकी शादी पारसी से हुई है। वहीं उनके साथ काम करने वाले राज्य मंत्री जॉन बार्ला ईसाई समुदाय के थे। यही नहीं इन दिनों राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी इकबाल सिंह लालपुरिया हैं, जो एक सिख हैं। उनकी नियुक्ति के साथ भारत सरकार ने इस परंपरा को भी तोड़ा था, जिसके तहत किसी मुसलमान को ही अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी दी जाती थी। बता दें कि एनडीए के ज्यादातर दलों से कोई मुस्लिम नेता चुनकर सदन में नहीं पहुंचा है। इस बार पूरे देश से कुल 28 मुस्लिम सांसद लोकसभा पहुंचे हैं।

कुल 5 अल्पसंख्यक नेता बने हैं मोदी सरकार में मंत्री

हालांकि एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि मोदी मंत्री परिषद में कुल 5 नेता अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। इन नेताओं में हरदीप सिंह पुरी और रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो सिख समुदाय से आते हैं। इसके अलावा रामदास आठवले और किरेन रिजिजू बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। वहीं केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन ईसाई समुदाय के हैं। बता दें कि इन मंत्रियों में से रवनीत सिंह बिट्टू किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। वह लोकसभी चुनाव में हार गए थे। वहीं जॉर्ज कुरियन ने चुनाव ही नहीं लड़ा था। माना जा रहा है कि पार्टी अब उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद भेजेगी। वह केरल में भाजपा के महासचिव भी हैं।

admin

Related Posts

छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के समक्ष किया प्रदर्शन, एनटीए को निरस्त करने की मांग

नई दिल्ली यूजीसी नेट में पाई गई विसंगतियों और उसके बाद इसे रद्द किए जाने के खिलाफ सैकड़ों छात्रों ने गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। स्टूडेंट्स…

मुख्यमंत्री धामी ने सीएम आवास में प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराध को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सीएम आवास में प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराध को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

कलियुग के 10,000 वर्षों के बाद क्या होगा? ब्रह्मवैवर्त पुराण की भविष्यवाणियां

कलियुग के 10,000 वर्षों के बाद क्या होगा? ब्रह्मवैवर्त पुराण की भविष्यवाणियां

आषाढ़ में कब रहेगी गुप्त नवरात्रि, जाने महत्व और पूजा विधि

आषाढ़ में कब रहेगी गुप्त नवरात्रि, जाने महत्व और पूजा विधि

गुरुवार 20 जून 2024 का राशिफल

गुरुवार 20  जून 2024 का राशिफल

जुलाई में इस दिन से शुरू होंगे शुभ मुहूर्त, कर सकेंगे जनेऊ, मुंडन, गृह प्रवेश; सिर्फ 8 दिन बजेगी शहनाई

जुलाई में इस दिन से शुरू होंगे शुभ मुहूर्त, कर सकेंगे जनेऊ, मुंडन, गृह प्रवेश; सिर्फ 8 दिन बजेगी शहनाई

सपने में मृत्यु देखना: क्या है इसका मतलब? जानें विस्तार से

सपने में मृत्यु देखना: क्या है इसका मतलब? जानें विस्तार से

बुधवार 19 जून 2024 का राशिफल

बुधवार 19 जून 2024 का राशिफल