मथुरा की होली, राधारानी मंदिर में कब होगी होली?

मथुरा, बरसाना और नंदगांव की होली पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां न सिर्फ रंग बल्कि, फूल, लड्‌डू, छड़ी और लठ्‌ठ से भी होली खेली जाती है. बांके बिहारी मंदिर में रंगोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है.

मथुरा के बरसाने में बंसा श्रीराधारानी मंदिर में 7 मार्च 2025 को लड्‌डूमार होली खेली जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लड्डूमार होली के दिन लोगों पर लड्डू फेंके जाते हैं और जिसके लड्डू लगते हैं वो अत्यंत सौभाग्यशाली होते हैं.

मथुरा और वृंदावन में 10 मार्च 2025 को फूलों की होली खेली जाएगी. इस दिन रंगभरी एकादशी भी है. रंगभरी एकादशी से काशी में भी रंगोत्सव शुरू हो जाता है.

ब्रज में होलिका दहन 13 मार्च 2025 को किया जाएगा. वहीं 14 मार्च को मथुरा, गोकुल, बरसाना, नंदगाव सहित पूरे भारत में रंगों से होली खेली जाएगी.

ब्रज में होली का उत्सव 22 मार्च तक चलेगा. ब्रज में होली की शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है, जो 40 दिन तक चलती है. बसंत पंचमी के दिन वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सुबह श्रृंगार आरती के बाद भगवान के गालों पर गुलाल लगया जाता है.

  • admin

    Related Posts

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति