भोपाल की हवा की गुणवत्ता खराब होने से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने आगामी तीन महीनों तक पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया

भोपाल
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को सबसे सुंदर राजधानी का ताज मिला है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां की हवा खराब होने लगी है। एक कारण यह भी है कि रवि की फसल कटते ही भोपाल की हवा और ज्यादा जहरीली हो जाती है। इस संकट को देखते हुए इस बार जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है। भोपाल जिले में अगले 3 महीने तक पराली जलाने पर रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने इससे संबंधी एक पत्र बुधवार को जारी कर दिया है।

भोपाल जिला प्रशासन द्वारा जारी किये गए पत्र में लिखा है कि खेत की आग के अनियंत्रित होने पर जन संपत्ति एवं प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जन्तु नष्ट हो जाते हैं। जिससे नुकसान होता है। इससे खेत की मिट्टी की उर्वरक शक्ति खत्म होती जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं खेत में पड़ा कचरा, भूसा, डंठल सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। इन्हें जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करना है।
पराली जलाने के हानिकारक प्रभाव

आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों को सलाह दी है कि जिले में कई किसान रोटावेटर एवं अन्य साधनों से डंठल खेत से हटा रहे हैं। यह सुविधा जिले में उपलब्ध हो गई है।
नरवाई जलाने पर एफआईआर

अगर किसी व्यक्ति ने इस आदेश का उल्लंघन किया तो उसके विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 5 मई 2025 तक लागू रहेगा। भोपाल अपर कलेक्टर ने सभी एसडीएम को निर्देशित किया है कि अगर कहीं पराली जलाने की घटना हो तो उस पर कार्रवाई की जाए।
एक्शन मोड में कलेक्टर

करीब तीन महीने पहले भी कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद पराली जलाने पर रोक लगाई थी, जो अब तक पूरे जिले में लागू है। इसके बाद अब फिर से रोक लगा दी गई है। भोपाल जिले की सीमा में बड़ी मात्रा में खेती की जाती है। यहां पर गेहूं अधिक मात्रा में बोई जाती है। इस कारण इसके बचे हुए अवशेष यानि पराली को जलाया जाता है, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। वहीं, कई बार खेतों की आग रहवासी इलाकों में भी पहुंच चुकी है। जिससे आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती है।

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