प्रियंका चोपड़ा से लेकर मारग्रेट थैचर तक महिला दिवस पर दे रही सफलता का मंत्र

महिला अधिकारों की बातों को हम सिर्फ एक दिन में सीमित करके नहीं रख सकते। पर, हां इस एक दिन यानी 08 मार्च को हम महिलाओं के संघर्ष और उनकी सफलता जश्न थोड़ा और ज्यादा जरूर मना सकते हैं। 1909 में पहली दफा महिला दिवस मनाया गया था। पिछले 116 सालों में हमने एक लंबा सफर तय किया है। पर, इस बात में कोई दोराय नहीं कि बराबरी और बेहतरी की राह अभी काफी लंबी है। दुनिया भर की प्रसिद्ध महिलाओं द्वारा महिला अधिकार और बराबरी के बारे में कही गई ये बातें अपने अधिकार और भविष्य को लेकर आपको जोश से भर देंगी:

प्रियंका चोपड़ा, अदाकारा
कोई आपको यह नहीं बताएगा कि यहां तुम्हारे लिए खास अवसर है। जाओ, अपने लिए अवसर तलाशो। आपको यह करना ही पड़ेगा, क्योंकि लोग आपसे सिर्फ मौके छीनेंगे ही। हमारे लिए यह बहुत जरूरी है कि महिलाएं एक-दूसरे की ताकत बनें। हमें दुनिया जीतने की कोई जरूरत नहीं।

क्वीन रानिया अल अब्दुला, जॉर्डन
अगर एक हिम्मती लड़की क्रांति ला सकती है, तो कल्पना करके देखिए कि हम सब साथ मिलकर क्या कर सकते हैं।

मेलिंडा गेट्स, समाज सेवी
ताकतवर महिला की क्या परिभाषा होती है? वह महिला जिसकी अपनी आवाज हो। पर, उस आवाज की तलाश का सफर बहुत ही मुश्किल भरा होता है।

सेरेना विलियम्स, टेनिस खिलाड़ी
हर महिला की सफलता दुनिया भर की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होनी चाहिए। हम जब एक-दूसरे को आगे बढ़ते देखकर खुशी के ठहाके लगाते हैं, तब सबसे ज्यादा ताकतवर और मजबूत होते हैं।

रूपी कौर, कनाडाई कवयित्री
वह कौन-सी सबसे बड़ी सीख है, जो महिलाओं को अपनानी चाहिए? वह सीख है कि शुरुआत से ही उसके भीतर वह सब कुछ है, जो जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए उसे चाहिए। यह दुनिया है, जिसने महिलाओं को खुद की क्षमताओं पर शक करना सिखाया है।

माया एंजेलो, अमेरिकी लेखिका
हर बार जब एक महिला अपने हक के लिए खड़ी होती है, तो यह मजबूती भरा कदम वह सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि दुनिया भर की सभी महिलाओं के लिए उठाती है।

मारग्रेट थैचर, पहली महिला प्रधानमंत्री, ब्रिटेन
राजनीति में अगर आप चाहते हैं कि कोई बात सिर्फ कही जाए, तो पुरुष राजनेता के पास जाएं। वहीं, अगर आप चाहते हैं कि कोई काम वाकई हो, तो महिला राजनेता के पास जाएं।

जे. के. रॉलिंग, प्रसिद्ध हैरी पॉटर सिरीज की लेखिका
दुनिया को बदलने के लिए हमें किसी जादू की जरूरत नहीं। वह ताकत हमारे भीतर पहले से है। हमारे पास बेहतर कल्पना शक्ति की ताकत है।

मलाला यूसुफजई, सामाजिक कार्यकर्ता
मैं अपनी आवाज उठाती हूं इसलिए नहीं ताकि मैं चिल्ला सकूं बल्कि इसलिए ताकि जिनके पास आवाज नहीं है, उनकी बात भी सुनी जा सके।

  • admin

    Related Posts

    चाणक्य नीति के अनुसार: इन पारिवारिक बातों को बाहर बताया तो बिखर सकता है पूरा परिवार

    कूटनीति और जीवन दर्शन के महानायक माने जाने वाले आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य नीति केवल राज्य चलाने का शास्त्र…

    AI की रेस में चीन का Kling आगे? जानिए क्यों दुनियाभर में मचा रहा है तहलका

    नई दिल्ली AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से वीडियो बनाने का ट्रैंड इन दिनों काफी चल रहा है। क्रिएटर्स के लिए AI एक जरूरी टूल बन गया है। चीन की कंपनी Kuaishou…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति