Xiaomi 16 को लेकर चर्चा शुरू , 3D-प्रिंटेड होगा फ्रेम

नई दिल्ली

Xiaomi की 15 सीरीज फाइनली लॉन्च हो चुकी है। 11 मार्च से फोन की सेल का आगाज होने वाला है। इस बीच Xiaomi 16 को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अभी ये जल्दबाजी होगा कि Xiaomi 16 पर चर्चा हो रही है। लेकिन अफवाहों का बाजार तेज हो चुका है। फोन के डिजाइन को लेकर नया दावा किया गया है। साथ ही इस बार फोन का डिजाइन काफी अलग हो सकता है। क्योंकि इसमें काफी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। Ming-Chi Kuo ने X पर इसको लेकर नया दावा कर दिया है।

Xiaomi 16 Pro में होगा 3D-प्रिंटेड फ्रेम?
एक नई लीक के मुताबिक, Xiaomi 16 Pro में 3D प्रिंटेड फ्रेम दिया जा सकता है। यह जानकारी TF Securities International के विश्लेषक Ming-Chi Kuo ने X पर शेयर की है। Kuo के अनुसार, Xiaomi 16 Pro में मेटल मिड-फ्रेम होगा, जिसे चाइनीज सप्लायर Bright Laser Technologies की 3D प्रिंटिंग तकनीक से तैयार किया जाएगा।

3D प्रिंटिंग से फोन को क्या फायदा होगा?
Kuo का कहना है कि 3D-प्रिंटेड फ्रेम का हल्का और खोखला डिजाइन फोन के वजन को कम करने में मदद करेगा। साथ ही, इससे थर्मल परफॉर्मेंस भी बेहतर होगी, यानी फोन अधिक हीटिंग के बिना लंबे समय तक अच्छी परफॉर्मेंस देगा। खास बात यह है कि इससे फोन की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

3D प्रिटिंग के सामने कुछ चुनौतियां भी देखने को मिल सकती हैं-
हालांकि, 3D प्रिंटिंग तकनीक इतनी आसान नहीं है। इसे लेयर वाइज बनाया जाता है, जिससे प्रोडक्शन के मेकिंग में ज्यादा टाइम लगता है। साथ ही ये टेक्नोलॉजी थोड़ी महंगी भी साबित होती है। क्योंकि इसकी मैनुफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी की कीमत भी ज्यादा होती है।

पहले भी हुआ था 3D टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
3D-प्रिंटेड स्मार्टफोन फ्रेम्स पहली बार नहीं आ रहे हैं। 2000 के दशक की शुरुआत में, Sharp ने mova SH251iS नामक पहला ग्लास-फ्री 3D डिस्प्ले वाला फोन लॉन्च किया था। हालांकि, यह टेक्नोलॉजी कुछ समय के लिए थी और सिर्फ कुछ स्पेशल एंगल्स पर ही वर्क करती थी। अभी टेक्नोलॉजी काफी आगे जा चुकी है। उदाहरण के लिए, ZTE Nubia Pad 3D जैसे डिवाइसेस में बिना चश्मे के 3D डिस्प्ले दिए जा रहे हैं।

3D प्रिंटेड स्मार्टफोन फ्रेम कब तक आ सकते हैं?
हालांकि, 3D-प्रिंटेड फ्रेम्स को अपनाने में समय लग सकता है। यह टेक्नोलॉजी उतनी जटिल नहीं है जितनी ग्लास-फ्री 3D डिस्प्ले बनाना, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन में लाने के लिए कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं।

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