‘एक जिला-एक उत्पाद’ हमारे कारीगरों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 'एक जिला-एक उत्पाद' हमारे कारीगरों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में आयोजित 'एक जिला-एक उत्पाद' (ओडीओपी) एक्सपो ने स्थानीय कारीगरों और किसानों के उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान किया। जीआईएस-भोपाल में 38 जिलों के विशिष्ट ओडीओपी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिला। जीआईएस-भोपाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओडीओपी को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त पहल बताया। उन्होंने कहा कि हर जिले का एक खास उत्पाद उसकी सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन सकता है। ओडीओपी कार्यक्रम से लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल ब्रांड बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस-भोपाल में ओडीओपी-एक्सपो से हमारे स्थानीय उत्पादों, विशेष रूप से हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान बनाने का अवसर मिला है।

कला , हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों का हुआ सजीव प्रदर्शन

एक्सपो में ओडीओपी के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए, जिन्हें लाइव काउंटर और प्रोसेस काउंटर में विभाजित किया गया। लाइव काउंटर में बाग प्रिंट, जरी जरदोजी, बटिक प्रिंट, कालीन, चंदेरी साड़ी, बांस, बलुआ पत्थर और कपड़े की जैकेट जैसे आठ प्रमुख उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया को कारीगरों ने लाइव प्रदर्शित किया।

जीआईएस-भोपाल में आयोजन के दौरान विदेशी निवेशकों और उद्योगपतियों ने स्थानीय कारीगरों के हुनर को करीब से देखा और उनकी कार्यशैली को समझा। एक्सपो के ‘कुम्हार पुरा’ और ‘टेक्निकल ज़ोन’ के लाइव काउंटर भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने रहे।

 खाद्य और कृषि उत्पादों को मिली नई पहचान

ओडीओपी-एक्सपो में खाद्य, मसाले और फलों से जुड़े 38 जिला विशिष्ट उत्पादों को उनके निर्माण प्रक्रिया के साथ प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों की खरीद और निर्यात के अवसर भी उपलब्ध कराए गए। साथ ही, निवेशकों ने विशिष्ट उत्पादों के सेंपल लिए, जिससे भविष्य में व्यापारिक संबंध स्थापित होने की संभावना बढ़ी।

मध्यप्रदेश के विशिष्ट ओडीओपी उत्पाद

मध्यप्रदेश में ओडीओपी के तहत विभिन्न जिलों के पारंपरिक, वस्त्र और कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनमें बुरहानपुर का केला, ग्वालियर के आलू आधारित उत्पाद और स्टोन टाइल्स, खरगोन की मिर्च उत्पाद, मंदसौर के लहसुन उत्पाद, नीमच के धनिया उत्पाद, सतना के टमाटर आधारित उत्पाद, मुरैना की गजक और सरसों उत्पाद, इंदौर के आलू आधारित उत्पाद, भोपाल के अमरूद उत्पाद, चंदेरी की साड़िया, महेश्वर की साड़ियां और हथकरघा उत्पाद, टीकमगढ़ के मिट्टी शिल्प और हस्तशिल्प उत्पाद और धार के बाग प्रिंट शामिल है।

राज्य के इन उत्पादों को मिला है जीआई टैग

बाग प्रिंट, बालाघाट का चिन्नौर चावल, दतिया और टीकमगढ़ बेल धातु का कार्य, चंदेरी साड़ी, गोंड पेन्टिंग, ग्वालियर के हैन्डमेड कारपेट, जबलपुर का पत्थर शिल्प, झाबुआ का कड़कनाथ, इंदौर के चमड़े के खिलौने, माहेश्वरी की साड़ी, मुरैना की गजक, रतलामी सेव, रीवा का सुन्दरजा, उज्जैन का बटिक प्रिंट, सीहोर का शरबती गेहूँ, वारासिवनी की हेण्डलूम साड़ी, डिण्डोरी के मेटल वर्क को जीआई टैग मिला है।

एक्सपो में हुआ निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों में संवाद

एक्सपो में निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों के बीच संवाद का अवसर मिला, जिससे प्रदेश के कारीगरों और उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने की नींव रखी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा "विदेशी निवेशकों से हुए मेल-मिलाप ने प्रदेश के उत्पादों को ग्लोबल व्यावसायिक मंच देने की आधारशिला रखी गई है।"

जीआईएस, भोपाल में ओडीओपी-एक्सपो ने यह साबित कर दिया कि मध्यप्रदेश के पारंपरिक उत्पादों में वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

 

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