आजम खां की पत्नी, बेटे और बहन की अंतरिम जमानत अवधि अब 20 मार्च तक बढ़ गई, साल 2020 का है मामला

रामपुर
शत्रु संपत्ति से संबंधित अभिलेख खुर्द-बुर्द मामले में आरोपित बनाए गए सपा नेता आजम खां की पत्नी पूर्व सांसद तजीन फातमा, बड़े बेटे अदीब और बहन निगहत अखलाक की अंतरिम जमानत अवधि अब 20 मार्च तक बढ़ गई है। मंगलवार को तीनों की स्थायी जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी थी। इसके लिए तीनों न्यायालय में पेश हुए। उनके अधिवक्ता विनोद शर्मा ने बताया कि हड़ताल के कारण स्थायी जमानत अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी और न्यायालय ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ा दी है।

साल 2020 का है मामला
यह मुकदमा रिकॉर्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में नौ मई 2020 को लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद व अज्ञात के विरुद्ध दर्ज कराया गया था। इसमें शत्रु संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का आरोप है।

जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास थी शत्रु संपत्ति
यह शत्रु संपत्ति आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास थी, जो इमामुद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी। इमामुद्दीन कुरैशी विभाजन के समय देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। वर्ष 2006 में यह संपत्ति शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज कर ली गई थी।

राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा का आरोप
भूमि के रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला था कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कर शत्रु संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के लिए आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में अंकित कर दिया था। रिकॉर्ड के पन्ने फटे हुए पाए गए थे।

आजम खां के बेटे अब्दुल्ला को पहले मिल गई है जमानत
इसमें आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला समेत जौहर ट्रस्ट के अन्य सदस्य आरोपित बनाए गए थे। ट्रस्ट में ज्यादातर लोग आजम खां के परिवार के हैं। इसमें अब्दुल्ला की जमानत अर्जी 18 फरवरी को मंजूर हुई थी, जबकि अगले दिन डॉ. तजीन फात्मा, अदीब आजम और निगहत अखलाक की अंतरिम जमानत अर्जी मंजूर हुई थी। तब से तीनों अंतरिम जमानत पर हैं।

सवा सोलह महीने बाद जेल से घर आए थे अब्दुल्ला
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम सवा सोलह माह बाद 26 फरवरी को जेल से बाहर आए थे। उनके घर के पास जमा लोगों ने उनका स्वागत किया था। बता दें कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में सजा होने के बाद 18 अक्टूबर 2023 को उन्हें अदालत ने जेल भेज दिया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को उन्हें हरदोई जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। तब से ही वह जेल में थे।

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