होली पर भद्रा का साया, जाने कब होगा होलिका दहन

पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है. बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है. होलिका दहन से पहले महिलाएं घर में सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं. उसके अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है. मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में होलिका का पूजा और दहन करने शुभ फलों की प्राप्ति होती है. होलिका दहन से पहले महिलाएं घर की सुख-समृद्धि के लिए पूजा पाठ करती है और होलिका दहन के दौरान इसकी कच्चा सूत परिक्रमा करते हुए लपेटा जाता है. इसके साथ ही कई अन्य पूजा -पाठ की रस्में की जाती हैं, लेकिन इस बार होलिका दहन पर सुबह से ही भद्रा का साया है.

होलिका दहन पर भद्र का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज सुबह 10 बजकर 35 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 26 मिनट तक भद्रा रहेगी. ऐसे में रात 11:30 बजे के बाद होलिका दहन किया जा सकेगा.

होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन का अच्छाई पर बुराई की जीत का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जल सकती. उसने भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई. मान्यता है कि इस होलिका दहन के दौरान परिक्रमा करते हुए प्रार्थना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

  • admin

    Related Posts

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति