शीतला अष्टमी पर करे मां शीतला की पूजा रोग और संक्रमण रहेंगे दूर

वैसे तो पूरे चैत्र माह में मां शीतला की पूजा होती है लेकिन अष्टमी तिथि मुख्य रुप से मालवा, निमाड़, राजस्थान और हरियाणा के बहुत सारे भागों में मनाई जाती है। शीतला अष्टमी को बासौड़ा, बूढ़ा बसौड़ा या बसियौरा नामों से भी जाना जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी और अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इन दोनों तिथियों पर शीतला माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा और व्रत करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस वर्ष शीतला सप्तमी का व्रत 21 मार्च 2025 शुक्रवार को है और शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च 2025 शनिवार को है। इस व्रत में बासा भोजन खाने का विधान है इसलिए इसे बसौड़ा, बसियौरा व बसोड़ा भी कहा जाता है।

माता शीतला शारीरिक गर्मी से ताप, टीवी, स्पर्श रोग तथा अन्य वायरस के दुष्प्रभावों से निजात दिलाती हैं। माना जाता है कि ज्वर, चेचक, एड्स, कुष्ठरोग, दाहज्वर, पीतज्वर, विस्फोटक, दुर्गन्धयुक्त फोड़े तथा विभिन्न त्वचा संबंधी रोगों से ग्रस्त होने पर मां की उपासना रोगों से मुक्ति दिलवाती है।  

शीतला अष्टमी 2025 पूजा मुहूर्त
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 मार्च की सुबह 4:23 पर शुरु होगी और 23 मार्च की भोर पर 5:23 पर समाप्त होगी। शीतला अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:41 से सुबह 6:50 तक रहेगा। 

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