शहर की बावड़ियों के जीर्णोद्धार का काम प्रमुखता से कराएं, जल गंगा संवर्धन अभियान की तैयारी बैठक में दिए निर्देश

ग्वालियर
शहर की बावड़ी व अन्य पुरानी जल संरचनाओं का जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रमुखता के साथ जीर्णोद्धार कराएं साथ ही घर-घर में रेन वाटर हार्वेस्टींग प्रणाली प्रमुखता से स्थापित कराएं। शहर भर में प्रमुख स्थानों व बाजारों में ग्रीष्म ऋतु के दौरान सार्वजनिक प्याऊ भी खोलें। इस आशय के निर्देश कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा के दौरान दिए।

राज्य शासन के दिशा निर्देशों के तहत वर्ष प्रतिपदा 30 मार्च से ग्वालियर जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू होगा। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने गुरुवार को बाल भवन के सभागार में संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित होने वाली गतिविधियों पर चर्चा की। साथ ही अभियान को सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक कुमार व नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

कलेक्टर श्रीमती चौहान ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि भवन अनुमति के समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग मद में जमा कराई गई धनराशि से जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान शहर भर में विशेष रूप से रूफ वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं बनवायी जाएं। उन्होंने सरकारी भवनों में प्रमुखता के साथ ऐसी संरचनाएं बनवाने के लिए कहा। कलेक्टर ने शहर की पहाड़ियों पर ट्रेंच बनाकर वर्षा जल का संरक्षण करने के भी निर्देश दिए। साथ ही कहा कि वन विभाग की मदद से मिट्टी की सीड बॉल (बीज की गेंद) तैयार कर पहाड़ियों पर बनाई जाने वाली ट्रेंच में डालने के लिए कहा। उन्होंने पहाड़ियों को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

जल गंगा संवर्धन अभियान की तैयारी को लेकर हुई बैठक में कलेक्टर श्रीमती चौहान ने नलों के लीकेज ठीक करने , टूटे हुए नलों को बदलने व पाइप लाइनों के लीकेज सुधारने के निर्देश भी दिए। साथ ही घरों और सार्वजनिक स्थलों पर पानी का अपव्यय रोकने पर बल दिया।

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले के ग्रामीण अंचल में 300 खेत तालाब बनाए जाएंगे। ग्रामीण अंचल में अमृत सरोवरों का भी निर्माण किया जायेगा। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने तालाबों के किनारे अभियान के तहत वृहद स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किसान कल्याण व कृषि विकास , उद्दयानकी , लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पर्यावरण , वन, राजस्व, जल-संसाधन व उद्योग इत्यादि विभागों के अंतर्गत की जाने वाली गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही राज्य शासन के दिशा निर्देशों के तहत अभियान की सभी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से मूर्त रूप देने के निर्देश दिए।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति