चैत्र नवरात्र में कर लें ये आसान उपाय, घर को खुशहाली से भर देंगी मां भगवती

चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने जा रही है. चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. काफी संख्या में लोग चैत्र नवरात्र में व्रत भी करते हैं. कुछ उपाय ऐसे बताए गए हैं जिन्हें अगर नवरात्र में करते हैं तो देवी मां की असीम कृपा अपने भक्त पर बरसती है. इन उपायों के जरिए घर में सुख-शांति का वास होता है. परिवार में खुशहाली बनी रहती है. आर्थिक समेत सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं.

चैत्र नवरात्र में लौंग से जुड़ा एक उपाय आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.  इस उपाय को करने के लिए ज्योतिषविद के अनुसार,  अपनी उम्र के बराबर लौंग लें यानी जितने साल के आप हैं, उतनी ही लौंग लें. फिर इसे काले धागे में बांधकर माला बना लें. इस माला को नवरात्र में किसी भी दिन देवी को अर्पित करें और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करें. मनोकामना पूरी होने पर माला को जल प्रवाह कर दें.

धन की बढ़ोतरी का उपाय
अगर घर में आर्थिक तंगी चल रही है या परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है तो शुक्रवार के दिन 5 लौंग और 5 कौड़ियां लेकर लाल कपड़े में बांध लें. इसके बाद इस पोटली को तिजोरी या धन के स्थान पर रख दें. यह उपाय धन लाभ को बढ़ा सकता है. नवरात्र के शुभ अवसर पर 21 लौंग जलाकर मां लक्ष्मी का ध्यान करें. कहते हैं कि ऐसा करने से रुका हुआ धन वापस मिल जाता है.

नवरात्र में क्या ध्यान रखना है जरूरी
दुर्गा मां के सभी 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. और जो नियम बताए गए हैं उनका पालन करना चाहिए. घर में साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए. खासतौर पर पूजा घर के आसपास बिल्कुल भी गंदगी नहीं होनी चाहिए.

चैत्र नवरात्र के शुरू होते ही सबसे पहले घर के मंदिर में पूजा का स्थान बनाएं. मंदिर को स्वच्छ करके एक चौकी बनाएं और उसमें मां को विराजमान कराएं. मंदिर की थोड़ी सजावट भी करें. रोज ताजे फूल से देवी मां की पूजा करें. हमेशा स्नान के बाद ही पूजा करने के लिए बैठें.

पूजा और व्रत के नियम
अगर आप नौ दिनों तक उपवास कर रहे हैं तो अच्छी बात है, लेकिन आप किसी कारण नौ दिनों तक उपवास नहीं कर पा रहे हैं तो आप पहले दिन और अष्टमी को उपवास कर सकते हैं. जो लोग नौ दिनों तक व्रत करते हैं इन्हें नमक, अनाज, लहसुन, प्याज, मांसाहारी खाने से दूर रहना चाहिए. हमेशा शुद्ध चीजें ही खाएं.

अखंड ज्योत प्रज्वलित के नियम
अगर आप अखंड ज्योति जलाते हैं तो इस बात का आपको ध्यान रखना जरूरी है कि वह ज्योत बीच में बुझ न जाए. अखंड ज्योति जलाना बहुत शुभ माना गया है. यह देवी के शक्ति के सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. अगर आप अखंड ज्योत नहीं जलाते हैं तो मां की कृपा पाने के लिए आप रोज सुबह और शाम में मां के सामने घी का दीया जला सकते हैं.

मंत्रों का जाप

अगर आप मां के नौ अक्षर यानी नवार्ण मंत्र का जाप कर रहे हैं तो इसका उचित उच्चारण करना जरूरी है. यह मंत्र इस प्रकार है 'ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै'. इस मंत्र  के जाप से मां दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है.

दुर्गा सप्तशती पाठ
नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने या सप्तशती पाठ को सुनने से कष्ट दूर होते हैं. जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मकता का वास होता है. आपके सभी काम बनने लग जाते हैं. घर में सुख-समृद्धि का का वास होता है.

 

admin

Related Posts

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति