कैंसर, हार्ट और डायबिटीज की दवाओं की कीमतों में हो सकती है बढ़ोतरी

नई दिल्ली

भारत में जल्द ही कैंसर, डायबिटीज, हार्ट संबंधी रोगों की दवाओं और एंटीबायोटिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकारी नियंत्रण में आने वाली इन दवाओं की कीमतों में 1.7% तक की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। यह असर अगले दो से तीन महीनों में दिखाई दे सकता है, क्योंकि मौजूदा समय में इन दवाओं का स्टॉक 90 दिनों का पहले से ही उपलब्ध है।

दवाओं के दाम बढ़ने की वजह
रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के महासचिव राजीव ने बताया कि कच्चे माल और अन्य खर्चों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है। इससे फार्मा इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है।

फार्मा कंपनियों पर आरोप
रसायन और उर्वरक से संबंधित संसद की स्थायी समिति के अनुसार, फार्मा कंपनियों पर दवाओं की कीमतें बढ़ाने और नियामक नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लग चुके हैं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की रिपोर्ट में कहा गया है कि फार्मा कंपनियों ने 307 मामलों में नियमों का उल्लंघन किया है।

NPPA के अनुसार, ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) 2013 के तहत दवाओं की अधिकतम कीमत तय की जाती है, और सभी निर्माता और विक्रेता इन कीमतों के भीतर ही दवाएं बेचने के लिए बाध्य होते हैं।

सरकार की राहत की कोशिश
इस साल के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 36 जीवन रक्षक दवाओं से कस्टम ड्यूटी को हटा देने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर क्रोनिक रोगों से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

फार्मा कंपनियों पर लगे नियमों के उल्लंघन का आरोप 

NPPA ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत दवाओं की अधिकतम कीमत निर्धारित करता है. सभी दवा निर्माताओं और विक्रेताओं को इस तय कीमत (जीएसटी सहित) के भीतर ही दवा बेचने का निर्देश दिया गया है. इस साल के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 36 लाइफ सेविंग ड्रग्स से कस्टम ड्यूटी हटाने का ऐलान किया.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि कैंसर, रेयर डिजीज और अन्य गंभीर क्रोनिक डिजीज से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने 36 लाइफ सेविंग दवाओं से बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) पूरी तरह हटाने का फैसला किया है.

 

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