संघ के पूर्णकालिक प्रचारक संजय जोशी एक बार फिर सुर्खियों में, रामनवमी के बाद होने बेंगलुरु बैठक है काफी अहम

मुंबई/नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघ मुख्यालय के दौरे और संसद सत्र के खत्म होने के बाद बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक बेंगलुरु में हाेने की संभावना है। यह बैठक अप्रैल के तीसरी हफ्ते में प्रस्तावित है। इस बैठक में बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे पहले अप्रैल बीजेपी का इस हफ्ते 6 अप्रैल को स्थापना दिवस है। बीजेपी के स्थापना दिवस के दिन ही रामनवमी का पर्व है। बीजेपी द्वारा इस मौके को बड़े पैमाने पर सेलिब्रेट किए जाने की उम्मीद है, तो वहीं दूसरी तरफ कभी बीजेपी के कद्दावर संगठन मंत्री रह चुके संजय जोशी का जन्मदिन भी 6 अप्रैल को है।

6 अप्रैल से है अनूठा संयोग
पीएम मोदी के नागपुर दौरे के बाद संजय जोशी के नाम की चर्चा एक बार फिर हो रही है। उनके करीबियों को भरोसा है कि ऐसे में जब इसी साल अक्तूबर को संघ की स्थापना को 100 साल पूरे हो रहे हैं। उससे पहले संजय विनायक जोशी की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी हो सकती है। कुछ स्थानों पर संजय जोशी के जन्मदिन की बधाई देने वाले पोस्टर भी सामने आए हैं। संजय जोशी की उम्र अभी 62 साल है। ऐसे में 75 साल उम्र सीमा को देखते हुए उनके पास अभी वापसी का समय बचा हुआ है। यही वजह है कि संजय जोशी को पसंद करने वालों ने पीएम मोदी की नागपुर यात्रा के बाद नई उम्मीदें बांध ली है। जोशी के करीबियों का कहना है कि भले ही संजय जोशी राष्ट्रीय अध्यक्ष न बने लेकिन उनकी सक्रियता बढ़ेगी।

सात सालों तक साथ किया काम
6 अप्रैल, 1962 को जन्में संजय जोशी लंबे समय से एक सीमित भूमिका में सक्रिय हैं। वह भी पीएम मोदी की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक रह चुके हैं। जोशी 2001 से लेकर 2005 तक बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। नागपुर में जन्मे और वहां कुल साल तक प्रोफेसर रहे जोशी गुजरात में भी काम कर चुके हैं। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बीजेपी में 1987 में आए थे। इसके एक साल बाद जोशी को संघ ने बीजेपी गुजरात में भेजा था। इसके बाद उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ 1988 से 1995 तक लगातार काम किया था। 1995 में पहली बार बीजेपी को गुजरात में सत्ता का स्वाद चखने को मिला था।

तब देना पड़ा था इस्तीफा
संजय जोशी को आखिरी बार नितिन गडकरी ने अध्यक्ष रहते हुए 2011 में जोशी को विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी सौंपीं थी लेकिन तब उनकी वापसी को बीजेपी में स्वीकार नहीं किया था। चुनावों के बाद उन्हें मई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से और एक महीने बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में जोशी जोशी पिछले 12 सालों से अज्ञातवास में हैं। ऐसे में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 27 सितंबर, 2025 को 100 पूरे होंगे और इसी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल की आयु पूरी करेंगे, क्या उसके पहले संजय जोशी की वापसी हो पाएगी? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। पीएम मोदी की बेहद अच्छे माहौल में संघ मुख्यालय की यात्रा के बाद समर्थकों को उम्मीद है कि नई शुरुआत हो सकती है।

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