चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने अमेरिका की टैरिफ के लिए निकाला इंडियन रूट का रास्ता

नई दिल्ली

अमेरिका की तरफ से भारत, चीन समेत ज्यादातर देशों पर टैरिफ लगाया है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों को काफी नुकसान पहुंचने की उम्मीद है। यह नुकसान चाइनीज कंपनियों के लिए ज्यादा हो सकता है। क्योंकि अमेरिका ने चीन पर बाकी देशों के मुकाबले ज्यादा टैरिफ लगाया है। ऐसे में चाइनीज कंपनियां भारत की तरफ रुख सकती है, जिससे चाइनीज कंपनियों को अमेरिका के लगाए गए टैरिफ का कम नुकसान उठाना पड़े। यह फैसला रूस के फैसले की तरह हो सकता है, जिसमें रूस ने अमेरिकी बैन से बचने के लिए भारत को एक ट्रेड रूट बनाया था। इससे रूस को अमेरिकी बैन का कम नुकसान उठाना पड़ा था। चीन भी इसी प्लान को आगे बढ़ा रहा है।

क्या है चीन का प्लान?
रिपोर्ट की मानें, तो अमेरिकी टैरिफ ने चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों जैसे हायर, लेनोवो और हाइसेंस को अपनी कारोबारी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। यह सभी चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड भारत में मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी कर रहे हैं, जिससे भारत से अमेरिका समेत बाकी देशों को इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट की सप्लाई की जा सके। बता दें कि भारत में टैरिफ चीन और वियतनाम की तुलना में कम है।

भारत-चीन सीमा तनाव
चाइनीज कंपनियों को भरोसा है कि भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के नियमों में छूट दे सकती है। मौजूदा वक्त में भारत और चीन के बीच कूटनीतिक रिश्तों को बेहतर करने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि अभी भारत ने चीन जैसे पड़ोसी देशों से FDI की मंजूरी लेनी जरूरी है। साल 2020 में सीमा में तनाव के बीच मुश्किल हो गया है।

भारत को होगा फायदा
एक्सपर्ट की मानें, तो चीन की तरफ से भारत में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा सकता है। इनका इस्तेमाल ग्रेटर नोएडा और पुणे के कारखानों में नई असेंबली लाइन में किया जा सकता है। एक्सपर्ट की मानें, तो टैरिफ भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हायर अभी चीन और वियतनाम से अमेरिका को निर्यात करता है।

कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
ओप्पो और वीवो स्मार्टफोन के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग करने वाली भगवती प्रोडक्ट्स के राजेश अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी बाजार के लिए वियतनाम और चीन में मैन्युफैक्चरिंग में भारत की तुलना में ज्यादा दबाव है। उनकी कंपनी अमेरिकी प्रोडक्शन को भारत शिफ्ट करने की योजना पर काम कर रहा है। ट्रंप ने भारत पर 26% का टैरिफ लगाया है, जो बाकी एशियाई कंपनियों से कम है।

प्रोडक्ट सप्लाई को मिलेगा बढ़ावा
ट्रंप ने चीन पर 54 फीसद, वियतनाम पर 46 फीसद, थाईलैंड पर 36 फीसद और ताइवान पर 32 फीसद टैरिफ लगाया हैं, जो 9 अप्रैल से लागू होंगे। हायर, हाइसेंस, लेनोवो, मोटोरोला, ओप्पो, वीवो और TCL जैसे चीनी ब्रांड अमेरिका में एक्टिव हैं, जो ज्यादातर चीन और वियतनाम से प्रोडक्ट सप्लाई करते हैं।

भारत के लिए होगा गेमचेंजर
कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर डिक्सन टेक्नोलॉजीज को भारत के लिए टैरिफ से फायदा होने की उम्मीद है। यह कंपनी अमेरिकी बाजार के लिए स्मार्टफोन बनाती है। FY25 में इसका अमेरिका में 1700-1800 करोड़ रुपये का कारोबार था।
एक्सपर्ट की मानें, तो मौजूदा वक्त में चीनी कंपनियों के लिए FDI मंजूरी में ढील देती है, तो यह भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के लिए गेमचेंजर हो सकता है।

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