इंदौर प्रेस क्लब का 63वां स्थापना दिवस, ‘इंदौर का पत्रकारिता घराना’ विषय पर वरिष्ठजनों ने रखे विचार

इंदौर

इंदौर प्रेस क्लब के 63वें स्थापना दिवस पर 7, 8 और 9 अप्रैल को इंदौर मीडिया कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। आज सोमवार को इस पत्रकारिता महोत्सव की शुरुआत हुई। पत्रकारिता महोत्सव के पहले सत्र का विषय 'इंदौर का पत्रकारिता घराना' रहा। इस आयोजन में देशभर से पत्रकारिता, फोटोग्राफी और साहित्य जगत की अनेक हस्तियां शामिल हो रही हैं।

लिखने का सलीका सीखने को मिला
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि नई दुनिया के बगैर इंदौर के पत्रकारिता घराने की बात करना बेमानी है। वहां की पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है।  लिखने का सलीका सीखने को मिला। यहां की पत्रकारिता एक तपस्या के जैसी थी। हमने भी इंदौर में 9 सालों तक धुनी रमाई।

शब्दों के सितारे रहे इंदौर के पत्रकार
वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने कहा कि 'घराना' शब्द सिर्फ इंदौर के लिए ही इस्तेमाल होता है। इंदौर से दिल्ली गए पत्रकार शब्दों के सितारे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता को नई ताकत दी है। उन्होंने बताया कि राजेंद्र माथुर कहा करते थे कि इंदौर की पत्रकारिता ने अपनी एक शैली बनाई और पत्रकारिता को नई धार दी। इंदौर से खिले फूल अपनी खुशबू के साथ राष्ट्रीय पत्रकारिता में मौजूद हैं।

घराने को अखबारों ने दी मजबूती
अमर उजाला समूह सलाहकार संपादक यशवंत व्यास ने कहा कि इंदौर की पत्रकारिता का अतीत भव्य किस्म का था। इंदौर का घराना सिर्फ इंसानों की बदौलत नहीं है, बल्कि यहां से निकले अखबारों ने इसे मजबूती दी। इंदौर की तासीर, यहां की गलियों चौराहों, भावनाओं से जो दृष्टि विकसित हुई, वही इस घराने में दिखती है।

 

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