सफदरजंग में 800 करोड़ की लागत से बनेगा मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर, इलाज करवाने वालों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली
वर्षों के इंतजार के बाद सफदरजंग अस्पताल ने मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया के तहत हाल ही में ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) जारी किया है। इसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी जाएगी। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि करीब 800 करोड़ की लागत से करीब एक हजार बेड वाला मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट करीब तीन साल में पूरा होगा। यह सेंटर बनकर तैयार हो जाने पर सफदरजंग अस्पताल में महिलाओं और बच्चों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।

बाल रोग के लिए करीब 650 बेड आवंटित
सफदरजंग अस्पताल के स्त्री रोग और बाल रोग विभाग में मरीजों का काफी दबाव रहता है। इस समय अस्पताल में स्त्री रोग, बाल रोग और बाल शल्य चिकित्सा के लिए करीब 650 बेड आवंटित हैं। इस अस्पताल में रोजाना 60 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं का प्रसव होता है।
 
दिल्ली सरकार के अस्पतालों के अलावा एनसीआर के अस्पतालों से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए इस अस्पताल में भेजा जाता है। इसके अलावा स्त्री रोग से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों का भी इलाज होता है। इस वजह से एक बेड पर दो महिला मरीजों को रहने को मजबूर होना पड़ता है। इस वजह से इस अस्पताल में लंबे समय से जच्चा-बच्चा देखभाल केंद्र के निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही थी। वर्ष 2014 में इस अस्पताल के विस्तार के लिए पहले चरण की परियोजना पूरी होने के बाद दूसरे चरण में इस केंद्र के निर्माण की घोषणा की गई थी। पहले चरण में 800 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक और वर्ष 2018 में 500 बिस्तरों वाला इमरजेंसी ब्लॉक बनकर तैयार हुआ था।

केयर सेंटर की परियोजना लंबित रही
इसके बाद मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर की परियोजना लंबित रही। वर्ष 2022 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से संबंधित स्थायी संसदीय समिति की रिपोर्ट में इस परियोजना को जल्द लागू करने की सिफारिश की गई। फिर अक्तूबर 2022 में अस्पताल प्रशासन ने परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर फाइल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी, लेकिन तब तकनीकी कारणों से परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद परियोजना में संशोधन कर दोबारा फाइल भेजी गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष के केंद्रीय बजट में मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर, छात्रावास और एक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए 238.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसलिए अब अस्पताल प्रशासन ने ईओआई जारी कर इस सेंटर के निर्माण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। जल्द ही इसके निर्माण की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को सौंपी जाएगी। वह कंपनी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कर वित्त विभाग से अंतिम मंजूरी प्राप्त करेगी और किसी निजी क्षेत्र की कंपनी को टेंडर आवंटित कर निर्माण कार्य कराएगी।

इस भवन को तोड़कर किया जाएगा निर्माण
पुराने इमरजेंसी ब्लॉक भवन को तोड़कर बहुमंजिला मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर का निर्माण किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन ने 1200-1400 बेड का सेंटर बनाने की योजना बनाई थी लेकिन जगह की उपलब्धता के अनुसार इस सेंटर में करीब एक हजार बेड होंगे। इसमें एक ही छत के नीचे महिलाओं और बच्चों के इलाज और जांच की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।

  • admin

    Related Posts

    हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

    नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

    हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति