महाराष्ट्र: राज ठाकरे और उद्धव ने दिए साथ आने के साफ संकेत, बस एक कसम खानी बाकी रह गई

मुंबई
क्या महाराष्ट्र की राजनीति की दशकों तक धुरी रहे ठाकरे परिवार में एकता होने वाली है? राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र की अस्मिता के नाम पर जैसा रुख दिखाया है, उससे ऐसी ही चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यही नहीं शनिवार को दोनों ने ही अलग-अलग जगहों पर कहा कि महाराष्ट्र और मराठी लोगों के हित में वे अपने मतभेद भुलाकर साथ भी आ सकते हैं। शनिवार का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के लीडर राज ठाकरे का एक पॉडकास्ट रिलीज हुआ। इसमें उनसे महेश मांजरेकर ने बात की है, जो मूल रूप से मराठी फिल्ममेकर हैं। मांजरेकर के एक सवाल के जवाब में कहा कि महाराष्ट्र के हित में वह छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाने के लिए तैयार हैं और वे उद्धव ठाकरे के साथ काम कर सकते हैं।

इसी पर उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की ट्रेड यूनियन भारतीय कामगार सेना के एक आयोजन में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह मराठी और महाराष्ट्र के हित में सारे मतभेद भुलाने के लिए तैयार हैं। लेकिन उद्धव ने एक शर्त भी रख दी कि राज ठाकरे को वादा करना होगा कि वह ऐसे दलों के साथ नहीं जाएंगे, जो महाराष्ट्र विरोधी हैं या फिर ऐसे दलों के साथ काम करते हैं। दरअसल महेश मांजरेकर ने सवाल पूछा था कि क्या दोनों ठाकरे बंधु साथ आ सकते हैं। इस पर राज ठाकरे ने कहा, ‘मेरे लिए महाराष्ट्र का हित सबसे अहम है। उसके बाद ही किसी और चीज का स्थान आता है। उसके लिए मैं किसी भी मतभेद को भुलाने और उद्धव ठाकरे के साथ काम करने के लिए तैयार हूं। बस सवाल इतना ही है कि क्या वह भी इसके लिए राजी होंगे।’

वहीं उद्धव ठाकरे ने तो इसका तुरंत ही जवाब दे दिया। एक कार्य़क्रम में उन्होंने कहा कि मैं साथ आने के लिए तैयार हूं। मराठी और महाराष्ट्र के हित में हम ऐसा करेंगे। लेकिन राज ठाकरे को यह कहना होगा कि वह महाराष्ट्र विरोधी लोगों के साथ नहीं जाएंगे। वह उनके साथ भी नहीं जाएंगे, जो इन लोगों का समर्थन करते हैं। एक बड़ी शर्त रखते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि ऐसी शपथ राज ठाकरे को छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने लेनी होगी। बता दें कि बीते कुछ समय में कई शादी समारोह एवं आयोजनों में उद्धव और राज ठाकरे आमने-सामने आए हैं। दोनों के बीच इन मौकों पर बातचीत भी हुई है। तभी से दोनों को लेकर कयास लगते रहते हैं कि क्या वे साथ आ सकते हैं।

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