पुस्तकें ज्ञान के भंडार के साथ-साथ हमारे लिए अनुभव, संवेदनाओं एवं प्रगति का प्रामाणिक दस्तावेज हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ई-लर्निंग के दौर में भी कम नहीं होगी पुस्तकों के अध्ययन की प्रासंगिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 पुस्तकें ज्ञान के भंडार के साथ-साथ हमारे लिए अनुभव, संवेदनाओं एवं प्रगति का प्रामाणिक दस्तावेज हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किताबें, बच्चों के सीखने का प्रमुख माध्यम हैं, साथ ही हमारे पुस्तकालयों को भी समृद्ध बनाती हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दीं विश्व पुस्तक दिवस की शुभकामनाएं

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व पुस्तक दिवस (23 अप्रैल) पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का जीवन में बड़ा महत्व है, पुस्तकें ज्ञान के भंडार के साथ-साथ हमारे लिए अनुभव, संवेदनाओं एवं प्रगति का प्रामाणिक दस्तावेज हैं, जिनके अध्ययन से जीवन को सदैव नई दिशा मिलती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और ई-लर्निंग के दौर में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भावना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दूरदर्शिता के अनुसार चिकित्सा और तकनीकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई राष्ट्रभाषा में संचालित करने का अभियान चलाया है। यह नई पीढ़ी को पुस्तकों से जुड़ाव के लिए प्रेरित करेगा। इससे अध्ययन की प्रासंगिकता बनी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया 'एक्स' और मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व पुस्तक दिवस पर पुस्तक मेला काफी प्रासंगिक है, प्रदेशवासी इसका लाभ उठाएं। उन्होंने पुस्तकों के अध्ययन पर जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ई-लर्निंग के दौर में पुस्तकों के अध्ययन का आनंद सबसे जुदा है। किताबें, बच्चों के सीखने का प्रमुख माध्यम हैं, साथ ही हमारे पुस्तकालयों को भी समृद्ध बनाती हैं।

 

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