गरियाबंद में मुठभेड़ में आठ लाख का इनामी माओवादी ढेर, बस्तर के माओवाद मुक्त गांवों में बनेंगे बलिदानियों के स्मारक

गरियाबंद
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देर रात सुरक्षा बल और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें एक माओवादी मारा गया। मृत माओवादी की पहचान साकेत उर्फ योगेश उर्फ आयतु के रूप में हुई है। ये डीबीसी (डिवीजन बॉडी काम्बैट) का सदस्य और शीर्ष माओवादी नेताओं का बॉडीगार्ड रह चुका था। उस पर आठ लाख रुपये का इनाम था। गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा ने बताया कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सीमा पर जिला बल सीआई-30 और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम सर्च ऑपरेशन के लिए भेजी गई थी। शाम करीब छह बजे मोतीपानी जंगल में घात लगाए माओवादियों ने सुरक्षाबल पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक माओवादी को मार गिराया।

ऐसे तय होता है इनाम
50 लाख से एक करोड़ के इनामी : पोलित ब्यूरो, सेंट्रल कमेटी
25 लाख के इनामी : स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य (एसजेडसीएम)
10 लाख के इनामी : कंपनी कमांडर
8 लाख के इनामी : डिविजनल कमेटी, बटालियन सदस्य, कंपनी सदस्य, डिप्टी व प्लाटून कमांडर
5 लाख के इनामी : प्लाटून सदस्य, एरिया कमेटी सदस्य, लोकल ऑपरेशनल स्क्वायड, कमांडर, लोकल गुरिल्ला स्क्वायड कमांडर
3 लाख के इनामी : सेक्शन कमांडर
1 लाख के इनामी : एलओएस सदस्य, एलजीएस सदस्य, जनमिलीशिया सदस्य पर यह इनाम घोषित किया जाता है।

बस्तर के माओवाद मुक्त गांवों में बनेंगे बलिदानियों के स्मारक
बस्तर में माओवादी आतंक के काले अध्याय को मिटाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने “हमर बलिदानी योजना” शुरू की है। इसके अंतर्गत उन गांवों में स्मारक बनाए जाएंगे जो माओवादी आतंक का केंद्र रहे अब शांति की राह पर लौट आए हैं। स्मारकों से स्थानीय बलिदानियों की वीरता और योगदान को सहेजा जाएगा। ऐसे 500 स्मारक बनाए जाएंगे।

संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। प्रत्येक स्मारक पर तीन लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पंचायत विभाग को इस योजना की जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि माओवादी हिंसा के प्रतीक स्मारकों को सुरक्षा बल लगातार ढहा रहे हैं। सरकार का दावा है कि मार्च 2026 तक बस्तर को माओवाद मुक्त कर लिया जाएगा।

राजनीतिक एकजुटता का संदेश
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू से हुई बातचीत को इंटरनेट मीडिया पर साझा किया। इस बातचीत में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष साहू ने सरकार की नक्सल विरोधी कार्रवाई की सराहना की ही और कहा कि जब कोई अच्छा काम हो रहा है, तो विपक्ष में रहकर भी उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए।

साहू ने इस बात पर ज़ोर दिया कि झीरम घाटी जैसी घटनाएं किसी एक पार्टी की नहीं, पूरे राज्य की पीड़ा हैं और इस पर सभी दलों को एकजुट होना चाहिए। बता दें कि झीरम घाटी में हुई नक्सली वारदात में कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के नेताओं समेत 31 लोग मारे गए थे।

राज्य के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि बस्तर में माओवाद पीड़ित परिवारों के लिए विशेष सर्वे कराया गया है, जिसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर दिए जा रहे हैं। साथ ही बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम ने युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति