विदेश सचिव की ट्रोलिंग, भाजपा सरकार खुद को बचना चाह रही: अखिलेश यादव

लखनऊ

भारत-पाक के बीच सीजफायर ऐलान के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है. जिसे लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी आलोचना की है. उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा- निर्णय तो सरकार का होता है, किसी अधिकारी का नहीं. ये बेहद संवेदनशील, निंदनीय, शर्मनाक, आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि देश के एक बहुत बड़े अधिकारी और उसके परिवार के खिलाफ कुछ असामाजिक-आपराधिक तत्व सरेआम अपशब्दों की सारी सीमाएं तोड़ रहे हैं. लेकिन उनके मान-सम्मान की रक्षा के लिए न तो भाजपा सरकार, न ही उनका कोई मंत्री सामने आकर ऐसी अवांछित पोस्ट करनेवालों के खिलाफ किसी कार्रवाई की बात कर रहा है.

अखिलेश यादव ने लिखा- ऐसी पोस्ट और बयानों से, दिन-रात एक करके देश के लिए समर्पित रहनेवाले सत्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल टूटता है. कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी और नाकामयाबी के लिए किसी और की ओर ध्यान भटकाकर खुद को बचना चाह रही हो. भाजपा सरकार से हमारी खुली मांग है कि इन सबकी तुरंत गहरी जांच हो और इनके सोशल मीडिया एकाउंट्स और बैंक खाते से लेकर ई-पेमेंट के सभी एकाउंट्स का पूरा ब्यौरा निकाला जाए. आज ही, तुरंत, तत्काल अभी ही ईडी, सीबीआई, साइबर सिक्योरिटी व अन्य जांच एजेंसियों को असली काम पर लगाया जाए और पता किया जाए कि इनके पीछे कौन सी ताकतें काम कर रही हैं और ये राष्ट्र विरोधी लोग किस विदेशी ताकतों से पैसा लेकर देश में अमन-चैन-शांति को भंग करना चाहते हैं.

सपा प्रमुख ने लिखा- जो भाजपा सरकार बात-बात पर देश की सुरक्षा की आशंका के नाम पर प्रतिष्ठित यू ट्यूब चैनल्स को बंद कर देती है, वो ऐसे लोगों के बारे में चुप क्यों है? अगर ये सब भाजपा की रजामंदी से नहीं हो रहा है तो ये और भी गंभीर मसला है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक बात भी है. क्योंकि ऐसे तत्व देश के अंदर बैठे हैं और भाजपा सरकार उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ पा रही है. ये वही लोग हैं, जो किसी के भी खिलाफ सरेआम जहरीली बातें लिखते हैं, लेकिन उनका बाल भी बांका नहीं होता. चंद पैसों के लिए बिक जानेवाले ये लोग किसी के भी सगे नहीं हो सकते हैं. ऐसे लोगों को रोकने के लिए भाजपा सरकार ने अगर 24 घंटे में कोई कदम नहीं उठाया तो देश की जनता को ये समझते देर नहीं लगेगी कि ये किसके लोग हैं, किसके लिए काम करते हैं, कौन उन्हें बचा रहा है और क्यों. भाजपा की चुप्पी उसकी संलिप्तता मानी जाएगी.

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