सुशील मोदी की पत्नी के चुनाव लड़ने की ख्वाहिश के खुले इजहार से राजनीतिक गलियारों में मची खलबली

पटना
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिवंगत दिग्गज नेता सुशील कुमार मोदी की पत्नी जेसी जॉर्ज मोदी ने चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी है। बिहार में पार्टी के संघर्ष से अच्छे दिनों तक अगुआ रहे सुशील मोदी की पत्नी के चुनाव लड़ने की ख्वाहिश के खुले इजहार से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। सुशील मोदी का पिछले साल 13 मई को निधन हो गया था। उनकी पहली पुण्यतिथि पर पटना में आयोजित समारोह के बाद पत्रकारों से जेसी जॉर्ज मोदी ने कहा कि वो चुनाव लड़ सकती हैं।

पत्रकारों ने जब जेसी जॉर्ज मोदी से पूछा कि क्या वो राजनीति में आ सकती हैं, क्या वो चुनाव लड़ सकती हैं तो उन्होंने जवाब दिया- “मेरा भाषण नहीं सुने क्या स्टेज पर, बहुत गलत बात।” मीडिया ने फिर से पूछा कि क्या आप लड़ सकती हैं तो उन्होंने कहा- “हां लड़ सकती हूं।” फिर जेसी जॉर्ज मोदी ने कार में बैठते हुए कहा- “इतना अच्छा भाषण हमने दिया, भाषण नहीं सुने क्या।” समारोह में जेसी जॉर्ज मोदी ने नीतीश के साथ सुशील मोदी के रिश्तों को बहुत स्पेशल बताते हुए कहा कि जब दोनों अलग हो गए थे तो उनके पूछने पर मोदी ने रोते हुए कहा था कि नीतीश मेरे दोस्त हैं।

सुशील मोदी देश के उन गिने-चुने राजनेताओं में शामिल हैं, जो संसद और विधानमंडल के दोनों सदनों में रहे। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से राजनीति में आए सुशील मोदी चुनावी राजनीति में बिहार विधानसभा से आए। पटना सेंट्रल विधानसभा सीट से लगातार तीन बार जीतकर विपक्ष के नेता के पद तक पहुंचे सुशील मोदी 2004 में भागलपुर लोकसभा सीट से संसद पहुंचे। 2005 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार बनी तो वो पटना लौटे और एनडीए सरकार के उपमुख्यमंत्री बने। तब से वो विधान परिषद सदस्य बनते रहे।

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से अलग हो गए नीतीश कुमार के 2015 में लालू यादव से हाथ मिलाने के बाद बनी महागठबंधन सरकार को दो साल के अंदर गिराकर नीतीश को वापस एनडीए के साथ लाने का श्रेय सुशील मोदी को ही जाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद भी उन्हें फिर डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया और राज्यसभा सांसद बनाकर दिल्ली भेज दिया गया। नीतीश को मोदी की कमी लगातार खलती रही, जिसके कारण वो बीच में एक बार फिर अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक महागठबंधन के साथ चले गए थे।

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