मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के अफसरों ने सिंचाई परियोजनाओं का रिव्यू करना शुरू कर दिया

भोपाल
मध्य प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं को विधानसभा के आगामी चुनाव के पहले पूरा कराने पर सरकार फोकस करके काम करेगी। इसको लेकर मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के अफसरों ने परियोजनाओं का रिव्यू करना शुरू कर दिया है।

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा-

जितनी भी सिंचाई परियोजनाएं चल रही हैं, उनकी लगातार मॉनिटरिंग की जानी चाहिए। वन भूमि के दायरे में आने वाली परियोजनाओं में जहां वन विभाग की परमिशन जरूरी है वहां अपर मुख्य सचिव वन के साथ कोआर्डिनेशन कर समस्या का निदान किया जाए। जिन प्रोजेक्ट्स के निर्माण में देरी हुई है उसकी समीक्षा कर कारण पता किए जाएं। इस साल पूरी होने वाली परियोजनाओं को समय पर पूर्ण किया जाए।

इस साल दस परियोजनाओं का काम होगा पूरा प्रदेश में 200 करोड़ से अधिक लागत की दस परियोजनाओं को इस साल 31 दिसंबर के पहले पूरा करना होगा। कुल 3735.98 करोड़ की इन परियोजनाओं को लेकर

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि अधिकारी प्रोजेक्ट वर्किंग का फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे। साथ ही उन्होंने अगले चार साल में 36705.08 करोड़ की 38 परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए भी टाइम लाइन तय कर दी है और कहा कि हर प्रोजेक्ट एग्रीमेंट में बताई गई टाइम लिमिट में कम्पलीट होना चाहिए।

इन परियोजनाओं का पेमेंट और फिजिकल वेरिफिकेशन जांचने के निर्देश

सीएस ने यह भी कहा है कि पार्वती परियोजना, लोअर परियोजना और छिंदवाड़ा कॉम्प्लेक्स के साथ गोंड़ सिंचाई परियोजना और रतनगढ़ सूक्ष्म परियोजना के एग्रीमेंट के आधार पर पेमेंट और किए गए कामों का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाकर अलग से विभाग के जानकारी इसकी जानकारी देंगे। इसके साथ ही मूंझरी और चेटिखेड़ा सिंचाई परियोजना के लिए एग्रीमेंट भले ही हो गए हैं लेकिन एग्रीमेंट अवधि में काम हो पाने की संभावना नहीं है।

इसलिए इन परियोजनाओं को विलम्ब वाली कैटेगरी में शामिल किया जाए। मुख्य सचिव ने अफसरों को यह भी कहा है कि जल संसाधन विभाग के जिन प्रोजेक्ट्स से जल जीवन मिशन और जल निगम की निर्माणाधीन पेयजल परियोजनाओं का लाभ लोगों को मिलना है, ऐसे प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा कराने का काम किया जाए।

सभी प्रोजेक्ट्स में हाट पिपल्या सिंचाई परियोजना की लागत सबसे अधिक 4813.26 करोड़ 200 करोड़ से अधिक लागत वाले जिन 38 प्रोजेक्ट्स का रिव्यू सीएस जैन ने किया है इसमें सबसे अधिक लागत वाला प्रोजेक्ट हाट पिपल्या सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना है जिसके निर्माण में 4813.26 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके 29 जनवरी 2028 तक पूरा करने का टारगेट रखा गया है।

इसके बाद दूसरी बड़ी परियोजना छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना है जिसकी लागत 4309 करोड़ है और इसे इसी साल 20 जुलाई तक पूरा किया जाना है।

तीसरी बड़ी सिंचाई परियोजना सीतापुर हनुमना बराज एवं सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना है जिसकी लागत 3700.89 करोड़ रखी गई है और यह 12 सितंबर 2029 को पूरी होगी।

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