प्रधानमंत्री मोदी 31 मई को 863.69 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि पूजन करेंगे

प्रधानमंत्री मोदी 31 मई को 863.69 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि पूजन करेंगे

सिंहस्थ 2028 के अंतर्गत उज्जैन में हो रहे हैं कार्य

भोपाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को जंबूरी मैदान भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग के 863.69 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का वर्चुअल भूमि पूजन करेंगे। इनमें 778.91 करोड़ रुपए की लागत से शिप्रा नदी पर घाट निर्माण और 84.78 करोड़ रुपए की लागत से बैराज, स्टॉप डेम एवं वेंटेड कॉजवे निर्माण कार्य शामिल हैं। सिंहस्थ 2028 के अंतर्गत आने वाले श्रद्धालुओं को मोक्षदायनी शिप्रा नदी के निर्मल और अविरल जल में सुगमता से स्नान और सुविधा की दृष्टि से उज्जैन में विभिन्न विकास कार्य कराए जा रहे हैं ।

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि उज्जैन जिले में शिप्रा नदी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये दोनों किनारों पर शनि मंदिर से नागदा बायपास तक लगभग 30 किलोमीटर घाट निर्माण कार्य कराया जाएगा जिसकी लागत 778.91 करोड़ रूपये होगी। कार्य दिसंबर 2027 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। इसी प्रकार शिप्रा नदी पर जल संसाधन विभाग द्वारा 09 बैराज का निर्माण (उज्जैन जिले में 01, इंदौर जिले में 01 एवं देवास जिले में 07 बैराज) एवं नगर निगम उज्जैन द्वारा कालियादेह स्टॉप डेम का मरम्मत कार्य कराया जाएगा। कान्ह नदी पर 11 बैराजों (उज्जैन जिले में 05 एवं इंदौर जिले में 06) का निर्माण कार्य होगा । इन कार्यों की कुल लागत 84.78 करोड़ रूपये होगी।

सिंहस्थ 2028 के अंतर्गत अन्य कार्य

    कान्ह नदी पर कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना लागत राशि 919.94 करोड़ रूपये ।

    परियोजना के अंतर्गत कान्ह नदी के दूषित जल को 18.5 किलोमीटर कट/कवर एवं 12 किलोमीटर टनल निर्माण कर उज्जैन शहर की सीमा के बाहर शिप्रा नदी में प्रवाहित किया जाना प्रस्तावित है।

    परियोजना के निर्माण के लिये 15 मार्च 2024 को अनुबंध निष्पादित कर कार्य आरंभ किया जाकर सितम्बर 2027 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।

    सेवरखेडी – सिलारखेडी मध्यम सिंचाई परियोजना लागत राशि 614.53 करोड़ रूपये।

    परियोजना के तहत उज्जैन जिले के ग्राम सेवरखेड़ी में शिप्रा नदी पर बैराज का निर्माण कर पम्पिंग के माध्यम से प्रस्तावित सिलारखेडी जलाशय में जल एकत्रित कर आवश्यकता अनुसार क्षिप्रा नदी में प्रवाहित किया जायेगा।

    परियोजना से उज्जैन शहर को पेयजल एवं विभिन्न धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप निर्मल अविरल जल उपलब्ध कराया जायेगा। कार्य वर्ष 2027 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।

    सिंहस्थ 2028 से संबंधित सभी कार्यों (कुल राशि 2 हजार 398 करोड़ रूपये) की स्वीकृति समय सीमा में प्राप्त कर, सिंहस्थ 2028 के पूर्व दिसंबर 2027 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।

 

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति