स्कूलों में ज्वाइन करने लगे युक्तियुक्त शिक्षक, ग्रामीणों व बच्चों में खुशी का माहौल

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स्कूलों में ज्वाइन करने लगे युक्तियुक्त शिक्षक, ग्रामीणों व बच्चों में खुशी का माहौल

शिक्षकों की व्यवस्था से सुचारू होगी बच्चों की पढ़ाई, ग्रामीणों ने जताई खुशी

बिलासपुर
जिले में युक्तियुक्त शिक्षकों ने अपने नई पदस्थापना स्कूलों में ज्वाइनिंग देना शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक आधे से अधिक युक्तियुक्त शिक्षकों ने स्कूलों में ज्वाइनिंग दे दी है। 824 में से 400 से अधिक शिक्षकों ने आदेश के दूसरे दिन तक कार्यभार ग्रहण कर लिया है। कार्यभार ग्रहण करने का 09 जून 2025 दिन सोमवार को अंतिम दिन है। इसके साथ ही वे आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारी में जुट गए हैं। नए शिक्षकों के आने से गांव के पालकों और बच्चों में खुशी का माहौल है। बेहतर शिक्षा और अपने भविष्य को लेकर वे आशावान है।

      शासन की मंशानुरूप स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों की पढ़ाई को व्यवस्थित करने के प्रयास शिक्षकों ने शुरू कर दिए हैं। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत शिक्षकविहीन स्कूलों में शिक्षकों की प्रभावी नियुक्ति की गई है। इस पहल से अब तक शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय स्थिति में संचालित स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई का लाभ मिल सकेगा, शिक्षकविहीन गांवों में शिक्षकों की नियुक्ति से ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताते हुए कहा कि युक्त युक्तिकरण की प्रक्रिया से अब उनके गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकेगी।

      जिले के कोटा विकासखंड के दूरस्थ गांव खपराखेल एवं कुसुमखेड़ा, मस्तूरी ब्लॉक के सबरियाडेरा एवं लोहर्सी और तखतपुर ब्लॉक के डिलवापारा जैसे आदिवासी बैगा बाहुल्य ग्रामों में पूर्व में शिक्षक नहीं थे। इन सभी गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में अब दो-दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा, एकल शिक्षकीय स्थिति में संचालित पूर्व माध्यमिक शाला चितवार (तखतपुर), जैतपुर (मस्तूरी), तरवा एवं नगोई (कोटा) में तीन-तीन शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। वहीं, शासकीय हाईस्कूल कुकुदा (मस्तूरी) में पाँच शिक्षक, सैदा (तखतपुर) में चार, और कुकुर्दीकला (मस्तूरी) में तीन शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इन विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति से ग्रामीणों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से स्कूलों में शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। अब शिक्षक आने से बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो पाएगी और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।

      कोटा विकासखंड के खपराखेल व कुसुमखेड़ा के निवासियों ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण ये स्कूल लंबे समय से शिक्षकविहीन थे। बच्चों को पढ़ाई के लिए अपने गांव से दूर दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता था जिससे बच्चों को आने-जाने में अधिक समय लगता था वहीं छोटे बच्चों को थकान भी होती थी साथ ही स्कूल दूर होने से परिवार को उनकी सुरक्षा की भी चिंता बनी रहती थी। अब गांव के ही स्कूल में पर्याप्त शिक्षक होने से गांव के बच्चों को अपने ही गांव में अच्छी शिक्षा मिल सकेगी साथ ही परिवार की चिंता भी दूर होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए किए गए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से शिक्षक मिलने से ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से ही दूरस्थ और पिछड़े गांवों में शिक्षा की स्थिति में सुधार आ सकता है।

 

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