संजय राउत ने पीएम मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले साल को बताया नाकाम, विदेश नीति पर उठाए सवाल

मुंबई 
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले साल को नाकाम बताया और विदेश नीति, सुरक्षा, और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। राउत ने कहा कि मोदी का तीसरा कार्यकाल शुरू हो चुका है। लेकिन, पहले साल में कुछ खास नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि मोदी की ‘नंबर्स की राजनीति’ 240 सीटों पर अटक गई और उनकी दूसरी योजनाएं भी अधूरी रह गईं। राउत ने पूछा, “यह साल बेमिसाल नहीं है, आखिर क्या हुआ?”

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 साल में देश की दिशा और दशा खराब हो गई। इस साल 26 महिलाओं का सिंदूर उजड़ा, लेकिन मोदी चुप हैं। राउत ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणाएं की गईं, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने मोदी सरकार पर देश को कमजोर करने का आरोप लगाया। राउत ने कहा, “70 साल में देश ने ऐसी लाचारी नहीं देखी, जो मोदी के कार्यकाल में देखने को मिली। देश छोटे-छोटे देशों और कनाडा के सामने घुटने टेक रहा है।”
उन्होंने विदेश नीति को पूरी तरह बर्बाद बताया और दावा किया कि पाकिस्तान को चीन, रूस, तुर्की, अजरबैजान, अमेरिका, आईएमएफ, और एशियाई विकास बैंक ने समर्थन दिया, जबकि भारत जवाब देने में नाकाम रहा।
राउत ने संसद के विशेष सत्र की मांग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) ने पाकिस्तान को चार टुकड़ों में बांटने और उसकी हरकतों का जवाब देने की मांग की थी। लेकिन, सरकार ने कुछ नहीं किया। उन्होंने विदेश भेजे गए प्रतिनिधिमंडलों को राजनीतिक आयोजन करार दिया और कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मुलाकात कर उनका फीडबैक लेंगे। संजय राउत ने बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन पर पूरा ध्यान और बजट दिया जा रहा है। लेकिन, लोकल ट्रेनों की हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। गरीब लोग लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। लेकिन, सरकार की प्राथमिकता बुलेट ट्रेन है। यह सुरक्षा और जरूरतों की हत्या जैसा है। उन्होंने मोदी सरकार पर देश को कमजोर और लाचार बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विदेश नीति से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक, हर मोर्चे पर सरकार नाकाम रही है।

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