छत्तीसगढ़ के नेशनल पार्क क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा एक संयुक्त माओवादी विरोधी अभियान शुरू किया गया था

बीजापुर
पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज जगदलपुर सुंदरराज पी., पुलिस उप महानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज दंतेवाड़ा कमलोचन कश्यप, पुलिस उप महानिरीक्षक ऑप्स केरिपु- देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर- डा. जितेन्द्र यादव, पुलिस अधीक्षक एसटीएफ- त्रिलोक बसंल, पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा गौरव राय द्वारा नेशनल पार्क एरिया में संचालित अभियान के सबंध में जानकारी देते हुए बताया कि – छत्तीसगढ़ के नेशनल पार्क क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा एक संयुक्त माओवादी विरोधी अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं: संवेदनशील क्षेत्रों में नए सुरक्षा शिविर स्थापित करना, स्थानीय आबादी के लिए समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए माओवादी प्रभावित जिलों में राज्य विकास योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन और माओवादियों के सशस्त्र दस्तों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शुरू करना। परिणामस्वरूप, सुरक्षा बलों ने माओवादी संरचनाओं को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे उनके प्रभाव वाले क्षेत्र काफी कमज़ोर हो गए हैं।

विश्वसनीय सूचना में केंद्रीय समिति सदस्य गौतम उर्फ सुधाकर, तेलंगाना राज्य समिति सदस्य बंडी प्रकाश, भास्कर राव, दंडकारण्य स्पेशल जोनल समिति सदस्य पापा राव और कुछ अन्य सशस्त्र माओवादी कैडरों की क्षेत्र में उपस्थिति की पुष्टि की गई थी। सूचना के आधार पर माओवादियों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही के लिए संयुक्त टीम 5 जून 25 को रवाना हुईं। तलाशी अभियान के दौरान 5 म़़ई 25 की सुबह, माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। जवाबी कार्रवाई में, सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन को बहादुरी और कुशलता से जवाब दिया। परिणामस्वरूप मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने CCM गौतम ऊर्फ सुधाकर का शव और एक AK-47 रायफल बरामद की।

गौतम एक कुख्यात माओवादी नेता था, जो कई हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार था, जिनमें कई निर्दोष आदिवासी नागरिकों की मृत्यु और सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत हुई। इसके अतिरिक्त, माओवादी वैचारिक प्रशिक्षण समिति (RePOS) का प्रभारी होने के नाते, गौतम युवाओं को हिंसक और राष्ट्रविरोधी विचारधारा के ज़रिए गुमराह करने में भी सक्रिय था।

6 जून 25 को माओवादियों के साथ हुए मुठभेड़ में तेलंगाना स्टेट कमेटी सदस्य SZC भास्कर राव सहित 4 माओवादी एवं 7 जून 25 को 2 माओवादियों को मार गिराया गया । घटनास्थल के सर्च पर 1 एके-47 रायफल, 1-.303 रायफल, 1-315 बोर रायफल,2 – बीजीएल लांचर, 1-12 बोर देशी कटटा, भारी मात्रा में विस्फोटक, गोला बारूद एवं नक्सल सामग्री बरामद किया गया।मारे गये माओवादियों में 5 माओवादियों की शिनाख्त पूर्ण हुई है। शेष माओवादियों की शिनाख्तगी कार्यवाही जारी है ।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति