मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को दी गई सैद्धांतिक स्वीकृति, बनाई जाएंगी 30,900 किमी सड़क

भोपाल
छह हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले ऐसे क्षेत्रों को अब मुख्य मार्ग से जोड़ा जाएगा जहां 20 आवास और 100 से अधिक लोग रहते हैं पर बारहमासी सड़क से 50 मीटर दूर हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना में दो चरणों में बीस हजार से अधिक बसाहटों को 30 हजार 900 किलोमीटर सड़क बनाकर जोड़ा जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 21 हजार 630 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। यह राशि सरकार अपने बजट से लगाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कैबिनेट बैठक में यह योजना प्रस्तुत की। इसमें बताया गया कि वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पहला और वर्ष 2030-31 से 2034-35 तक दूसरे चरण में निर्माण कार्य किया जाएगा।
 
आयातित तुअर पर मंडी शुल्क नहीं
प्रदेश में तुअर दाल उद्योगों की आवश्यकता को देखते हुए बाहर से आयातित तुअर पर मंडी शुल्क से पूरी तरह छूट देने का निर्णय लिया गया। अभी सौ रुपये पर एक रुपये मंडी शुल्क लेने का प्रविधान है। सरकार लगातार इसमें छूट दे रही है। वर्ष 2024-25 में मंडी समितियों को मंडी शुल्क से 1,329 करोड़ रुपये की आय हुई। छूट देने से लगभग 20 करोड़ रुपये की आय प्रभावित होगी। प्रदेश में 134 तुअर दाल प्रसंस्करण इकाइयां हैं, जिनकी क्षमता छह लाख टन है।

झाबुआ, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम में बनेंगे कामकाजी महिलाओं के छात्रावास
बैठक में झाबुआ, सिंगरौली, देवास और नर्मदापुरम में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास बनाने का निर्णय लिया गया। ये 350 सीट की क्षमता वाले होंगे। योजना निजी सार्वजनिक भागीदार माडल पर संचालित होगी और इस पर 40 करोड़ 59 लाख रुपये व्यय होंगे।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बनेगी जिला विकास सलाहकार समिति
प्रत्येक जिले की विकास योजना का रोडमेप तैयार करने और जिले की दीर्घकालीन विकास योजनाएं बनाने के लिए सभी जिलों में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति बनाई जाएगी। इसके उपाध्यक्ष जिले के प्रभारी मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। सांसद, जिले के समस्त विधायक, जिला मुख्यालय के महापौर या नगरपालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिले के सभी जनपद अध्यक्ष के साथ उद्योग, व्यापार, प्रगतिशील किसान, समाजसेवी, चिकित्सा, विधि आदि क्षेत्रों के 20 प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। कलेक्टर समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति जनता, जनप्रतिनिधियों व अन्य हितधारकों की जरूरतों और सुझावों के अनुसार दीर्घकालीन विकास की योजनाएं बनाएगी। वोकल फार लोकल के सिद्धांत के दृष्टिगत जिले की समृद्धि का रोडमैप तैयार करेगी।

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