कांग्रेस ने आप पार्टी और केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए निकाली कुर्सी यात्रा

लुधियाना
लुधियाना वेस्ट विधानसभा उपचुनाव में सियासी तापमान तेज हो गया है। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए शुक्रवार को एक "कुर्सी यात्रा" निकाली। इस यात्रा के माध्यम से कांग्रेस ने केजरीवाल पर राज्यसभा की सीट पाने की लालसा का आरोप लगाया। यात्रा के दौरान बैंड-बाजे के साथ एक रथ पर एक डमी केजरीवाल को एक विशाल कुर्सी पर बैठा दिखाया गया। कांग्रेस समर्थकों ने उस कुर्सी के चारों ओर पार्टी के झंडे लहराते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि लुधियाना वेस्ट सीट पर हो रही यह लड़ाई AAP प्रत्याशी संजीव अरोड़ा को विधायक बनाने की नहीं, बल्कि केजरीवाल को राज्यसभा पहुंचाने की साजिश है।

कार्यक्रम में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लाम्बा और पंजाब कांग्रेस के सह प्रभारी राणा गुरजीत सिंह ने भाग लिया। अलका लाम्बा ने कहा, "दिल्ली में मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनने के बाद केजरीवाल सत्ता के लिए बेताब हैं। अब वे पंजाब के माध्यम से राज्यसभा में घुसपैठ करना चाहते हैं। केजरीवाल अब शाही जीवन जीने के आदी हो चुके हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने अपने भ्रष्टाचार में फंसे करीबी लोगों मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और विभव कुमार को पंजाब में सरकारी पदों पर बैठाया। उन्होंने कहा, "अब केजरीवाल संजीव अरोड़ा की राज्यसभा सीट छीनकर खुद को वहां पहुंचाना चाहते हैं ताकि फिर से वैभवशाली जीवन जी सकें। वह दो राज्यों की Z+ सुरक्षा का आनंद ले रहे हैं।"

कांग्रेस प्रत्याशी भारत भूषण आशु ने भी केजरीवाल पर कटाक्ष किया और कहा, "लुधियाना वेस्ट में केजरीवाल विकास की बातें नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह उपचुनाव उनकी बेरोजगारी खत्म करने का प्रयास है।" उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने 13 वर्षों में पहली बार दिल्ली की नई दिल्ली विधानसभा सीट से हारकर बेरोजगार होने का अनुभव किया है और अब वे राज्यसभा सदस्य की नौकरी ढूंढ रहे हैं।

आशु ने कहा कि यह चुनाव केवल एक विधायक के चुनाव की नहीं, बल्कि एक पंजाबी राज्यसभा सदस्य की बलि देकर AAP के बेरोजगार नेता को फिर से सत्ता में पहुंचाने का षड्यंत्र है। कुर्सी यात्रा के जरिए कांग्रेस ने अपने चुनावी अभियान को एक प्रतीकात्मक और आक्रामक रूप दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा न केवल कांग्रेस के वोट बैंक को एकजुट करने का प्रयास है, बल्कि AAP की मंशा पर जनता का ध्यान केंद्रित करने की रणनीति भी है।

 

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