चम्पत राय ने बताया- भारत ने विश्व को श्रेष्ठ संस्कृति व ज्ञान दिया

गोरखपुर
विश्व में हिंदू ही ऐसा धर्म है जो नदियों को माता मानता है, पर्यावरण की पूजा करता है, समरसता का भाव रखता और सभी के सुख की कामना करता है। और ऐसा ही विश्व हिंदू परिषद के एकात्मकता स्तोत्र जो आपने विगत 10 दिनों में यहां पर रोज पढ़ा होगा उसमें भी वर्णित है। 

ध्यान और ज्ञान से भारत ने कराया अवगत
भारत ने ही पूरे विश्व को ध्यान और ज्ञान से अवगत कराया है। भारतीय सभ्यता मात्र एक भौगोलिक सीमा तक ही नहीं रही, इसका प्रभाव विश्वभर की संस्कृतियों पर पड़ा। वेद, पुराण, योग, आयुर्वेद, कला, साहित्य, शिल्प, वास्तुकला सहित जीवन जीने की आदर्श पद्धति ने असंख्य देशों, सभ्यताओं और जनजातियों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी”।

10 दिनों से चल रहे परिषद शिक्षा वर्ग का समापन
विश्व हिंदू परिषद द्वारा गोरखपुर महानगर के संस्कृति पब्लिक स्कूल में विगत 10 दिनों से चल रहे परिषद शिक्षा वर्ग के समापन एवं दीक्षांत समारोह में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव श्री चंपत राय ने उद्बोधन देते हुए उक्त विचार रखे। उन्होंने आगे बताया कि पूर्व एशियाई देशों, मध्य एशिया, यूरोप तक भारतीय ज्ञान, परंपरा और जीवन-मूल्य पहुंचे, जिसने उनके धर्म, जीवनदृष्टि और शासन प्रणाली तक प्रभावित किया।

भारतीय संस्कृति ने विश्व को उत्कृष्ट जीवन पद्धति दी
यह दर्शाता है कि भारतीय सभ्यता ने शांति, एकात्मता, सहिष्णुता, परोपकार, ज्ञान व साधना की अनुपम भेंट व प्रेरणा विश्व को दी। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति ने विश्व को ज्ञान, विज्ञान, कला सहित उत्कृष्ट जीवन पद्धति दी। इसका प्रभाव अनेक देशों की मूल परंपरा, भाषा, भूषा तक आया, जो उनके जीवन जीने, त्योहार मनाने, वेशभूषा अपनाने तक परिलक्षित होता है।

हमारी सांस्कृतिक सीमाएं विशाल थीं
इसका प्रमाण हमें अनेक स्थलों पर मिलने वाले शिलालेख, ग्रन्थ, प्रतीक चिह्न व परंपराओं से भी मिलता है।हमारी सांस्कृतिक सीमाएं विशाल थीं, वर्तमान के अनेक देश जम्बूद्वीप भारतवर्ष के अभिन्न भौगोलिक भाग थे। आज वे राजनीतिक रूप से भिन्न इकाई जरूर हैं, परन्तु सांस्कृतिक रूप से वे हमारे ही अटूट अंग रहे हैं।उन्होंने आह्वान किया कि हम अपनी श्रेष्ठ सांस्कृतिक परंपरा का गौरवबोध अनुभव कर सभी को इसकी जानकारी दे जिससे नई पीढ़ी को इसका गर्व हो सके। वर्ग प्रमुख राज नारायण ने अतिथि और वरिष्ठ कार्यकर्ता का परिचय कराया, मंच संचालन अश्विनी ओझा ने किया तथा प्रस्तावना विश्व हिंदू परिषद गोरक्ष प्रांत मंत्री नागेंद्र सिंह ने और आभार ज्ञापन प्रांत सह मंत्री मंगल देव चौबे ने किया।

ये रहे कार्यक्रम में शामिल
कार्यक्रम गोरक्ष प्रांत संगठन मंत्री राजेश, काशी प्रांत संगठन मंत्री नितिन कुमार,गोरक्ष प्रांत सह संगठन मंत्री दीपेश, गोरक्ष प्रांत मंत्री सह मंत्री सगुण श्रीवास्तव और मंगल देव चौबे,महानगर संगठन मंत्री सोमेश, उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ आरपी शुक्ल, दुर्गेश त्रिपाठी, तारकेश्वर, प्रांत संयोजक दुर्गेश राव, विभाग संयोजक विनोद मिश्र मंत्री अनूप शुक्ला, शीतल, गोपेश पाल, आर के सिंह कौशलेंद्र प्रताप सिंह,डॉ अजय सिंह पटेलआदि प्रशिक्षार्थियों के साथ उपस्थित रहे।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति