भीषण विमान हादसे में अपनी जान गंवाने वाले एयर इंडिया के पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल को दी अंतिम विदाई

अहमदाबाद
अहमदाबाद में 12 जून को हुए भीषण विमान हादसे में अपनी जान गंवाने वाले एयर इंडिया के वरिष्ठ पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल का पार्थिव शरीर आज मुंबई लाया गया और उन्हें नम आँखों से अंतिम विदाई दी गई। पवई के निवासी कैप्टन सभरवाल का पार्थिव शरीर डीएनए पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके आवास जलवायु विहार पहुँचा जहाँ परिजनों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने उन्हें अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कैप्टन सुमित सभरवाल, जिन्होंने कथित तौर पर मेघानी नगर की कई जिंदगियां बचाने का प्रयास किया था उनका अंतिम संस्कार आज सुबह 10 बजे चकला श्मशान घाट पर हुआ।।

प्रेरणादायक व्यक्तित्व को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
इस दुखद घड़ी में कैप्टन सभरवाल को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके परिवारजन, मित्र, सहकर्मी, एयर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में शुभचिंतक मौजूद थे। सोसायटी के निवासियों ने भी इस मुश्किल समय में परिवार के साथ खड़े होकर अपनी संवेदनाएं और सहयोग व्यक्त किया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैप्टन सभरवाल को एक बेहद जिम्मेदार, अनुभवी और समर्पित पायलट के रूप में याद किया गया। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन में अनुशासन, साहस और उत्कृष्ट सेवा की एक मिसाल कायम की थी। सहकर्मियों ने उन्हें एक प्रेरणादायक और मददगार व्यक्ति बताया वहीं परिजनों ने कहा कि वह न केवल पेशेवर रूप से सफल थे बल्कि निजी जीवन में भी अत्यंत संवेदनशील और सहयोगी स्वभाव के इंसान थे।
 
पिता का टूटा दिल, सहकर्मियों की भावुक यादें
पायलट सभरवाल की गुरुवार को अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हुए प्लेन क्रैश में मौत हो गई थी। रविवार को डीएनए मैच होने के बाद उनका शव परिवार को सौंपा गया था। 88 वर्षीय बुजुर्ग पिता द्वारा अपने 60 वर्षीय बेटे को हाथ जोड़कर दी गई अंतिम विदाई ने हर किसी की आँखों को नम कर दिया। यह दृश्य हर देखने वाले के दिल को छू गया। कैप्टन सुमित सभरवाल को एयर इंडिया के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद पायलटों में से एक माना जाता था। वह अपने को-पायलट क्लाइव कुंदर के साथ उस फ्लाइट को उड़ा रहे थे जिसमें 230 यात्री और 10 केबिन क्रू के सदस्य सवार थे। हादसे में कुल 242 में से 241 लोगों की जान चली गई जबकि केवल एक यात्री ही जीवित बच सका। कैप्टन सभरवाल के घर के पास रहने वाली और खुद एयर इंडिया में 37 साल तक केबिन क्रू रहीं ऊषा तड़वलेकर ने भावुक मन से बताया कि सुमित के चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रहती थी। वह जीवन भर एक लो-प्रोफाइल रहकर हमेशा अपने काम पर ध्यान देते थे। उनके निधन से एक ऐसे बेटे का अधूरा सपना भी टूट गया जो रिटायरमेंट लेकर अपने बूढ़े पिता की सेवा करना चाहते थे।

डीएनए पहचान प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी
अहमदाबाद विमान हादसे की जांच में एविएशन एक्सपर्ट्स की कई टीमें जुटी हुई हैं। वहीं अहमदाबाद प्रशासन और गुजरात सरकार का मुख्य ध्यान दुर्घटना के शिकार लोगों की पहचान कर उनके शव परिवार वालों को सौंपने पर है। डीएनए प्रोफाइलिंग के आधार पर अब तक 125 शवों की पहचान हो चुकी है और 124 मृतकों के रिश्तेदारों से संपर्क साधा जा चुका है। अब तक 83 शव परिवार वालों को सौंपे जा चुके हैं। डीएनए सैंपलिंग के लिए फॉरेंसिक लैब में एक्सपर्ट्स दिन-रात काम कर रहे हैं। हालांकि डीएनए सैंपल मैच करने में आमतौर पर कम से कम 72 घंटे लगते हैं लेकिन इस प्लेन क्रैश के शिकार लोगों के शव इतनी बुरी तरह जल गए हैं कि उनमें से डीएनए निकालना बहुत मुश्किल हो रहा है जिससे पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके डीएनए की जाँच पूरी की जा सके। इसके लिए गांधीनगर की फॉरेंसिक लैब में आसपास के जिलों के फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को भी बुलाया गया है। इस वक्त फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की 36 टीमें डीएनए प्रोफाइलिंग में लगातार जुटी हुई हैं।

 

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