QR कोड स्कैन कर दें पुलिस के व्यवहार की रिपोर्ट, इसी आधार पर होंगे तबादले

भोपाल 

अब हर एफआइआर के बाद शिकायतकर्ताओं को थाने में पुलिसकर्मियों के व्यवहार के संबंध में फीडबैक भी देना होगा। बताना होगा कि थाने में उनके साथ कैसा बर्ताव किया गया। पुलिसकर्मी ने अच्छे से बात की या नहीं। समस्या को ठीक से सुना या नहीं। इसके लिए थानों में क्यूआर कोड(QR Code) लगाए जा रहे हैं। इसको स्कैन करने के बाद शिकायतकर्ता ऑनलाइन फीडबैक भर सकेगा। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। भोपाल कमिश्नर को जारी पत्र के अनुसार थाने के किसी खुले स्थान पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा। जिसे स्कैन कर लोग सेवाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकेंगे। फीड बैक के आधार पर कमियों को दूर करेंगे। क्यूआर कोड को गूगल या एनआइसी के माध्यम से फॉर्म को जनरेट किया जाएगा। इसकी लिंक कमिश्नर की ई-मेल आईडी से लिंक होगी।

यह जानकारी देनी होगी
● नाम और मोबाइल नंबर

● अपराध नियंत्रण की स्थिति
● क्षेत्र में यातायात व्यवस्था

● सामाजिक गतिविधियों के दौरान पुलिस व्यवस्था

● आपदा के समय सहयोग

● पुलिसकर्मियों का व्यवहार

● पुलिसकर्मियों की कार्य दक्षता

● पुलिसकर्मियों की कार्यदक्षता
● थाना भवन की साफ सफाई

● थाना भवन में उपलब्ध संसाधन

● आगंतुकों की बैठने की व्यवस्था

क्यों जरूरी है पुलिस कार्यशैली का फीडबैक? 

पिछले समय में पुलिस के रवैये को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, जैसे-

    पुलिस कर्मचारियों का अमर्यादित व्यवहार।
    पुराने मामलों की धीमी या लापरवाही भरी जांच।
    झूठे मुकदमों में फंसाने की शिकायतें।
    थानों में सुविधाओं की कमी।

इन समस्याओं से निपटने और पुलिसिंग को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए फीडबैक सिस्टम की शुरुआत की गई है। इससे जनता की राय के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

QR कोड स्कैन कर दें फीडबैक

हर थाने के बाहर QR कोड लगाए जाएंगे जिन्हें आप अपने मोबाइल से स्कैन कर सकेंगे। स्कैन करते ही आपके सामने एक फॉर्म खुलेगा जिसमें आप निम्नलिखित जानकारियां भरेंगे-

    आपका नाम और मोबाइल नंबर
    थाने में आने का कारण
    पुलिस का व्यवहार कैसा था
    थाने की साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय जैसी सुविधाएं कैसी थीं
    आपके मामले की प्रगति या लंबित स्थिति
    आपके मामले की प्रगति क्या है?
    क्या आपको पुलिस से संतोषजनक सेवा मिली?
    कोई सुझाव या शिकायत जो आप साझा करना चाहते हैं?

यह फीडबैक जिला स्तर पर एसपी और प्रदेश स्तर पर पुलिस मुख्यालय द्वारा मॉनिटर किया जाएगा।

फील्ड अफसरों की तबादला सूची में जनता की भूमिका 

न सिर्फ फीडबैक, बल्कि जनता की राय को फील्ड अफसरों के तबादले के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय अब तबादला सूची तैयार करते समय इस फीडबैक को गंभीरता से लेगा, जिससे बेहतर और जवाबदेह पुलिसिंग को बढ़ावा मिलेगा।

यह व्यवस्था पुलिस कर्मियों की कार्यशैली को सुधारने में सहायक होगी और गलतफहमियों से बचाएगी।

देवास में पायलट प्रोजेक्ट: ऐसे हुई शुरुआत

मध्य प्रदेश पुलिस ने इस पहल का पायलट प्रोजेक्ट देवास जिले से शुरू किया है। यहां के सभी 21 थानों में QR कोड लगाए गए हैं। जनता इन कोड्स से फीडबैक देकर सीधे एसपी तक अपनी शिकायत और राय भेज रही है।

इसके अलावा, वल्लभ भवन भोपाल से कॉलर फीडबैक सर्वे भी चलाया जा रहा है, जिसमें जनता आठ सवालों के माध्यम से पुलिस की कार्यशैली का आकलन करती है।

हर थानों में लगवाएंगे क्यूआर कोड
क्यूआर कोड हर थानों में लगवाएंगे। इसके आधार पर कमियों को भी दूर किया जाएगा। कोशिश होगी लोगों की हर संभव मदद हो। थानों में लोगों को अच्छा वातावरण मिले यह हमारी प्राथमिकता में है।- हरिनारायण चारी मिश्रा, पुलिस कमिश्नर, भोपाल

पूरे प्रदेश में इसे लागू करने के निर्देश
देवास में इस व्यवस्था को पहले लागू किया गया था। अब मुख्यालय से पूरे प्रदेश में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यालय ने क्यूआर स्कैन कोड बनाया है। इसका फॉर्मेट सभी को दिया गया है।– पवन श्रीवास्तव, एडीजी, पुलिस मुख्यालय

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