भोपाल में 90 डिग्री मोड़ वाला ऐशबाग पुल अब फुटपाथ तोड़ चौड़ा होगा

भोपाल 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बना ऐशबाग रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) अपने उद्घाटन से पहले ही विवादों में घिर गया था, लेकिन अब 'आजतक' की खबर का असर दिखाई दे रहा है. इस ब्रिज के 90 डिग्री वाले खतरनाक मोड़ को लेकर उठे सवालों के बाद रेलवे ने डिजाइन में बदलाव के लिए अतिरिक्त जमीन देने की सहमति दे दी है. 

इस ब्रिज की डिजाइन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद PWD सूत्रों ने बताया कि रेलवे की ओर से जमीन उपलब्ध कराने पर ब्रिज की रेलिंग को तोड़कर 90 डिग्री वाले मोड़ को और घुमावदार बनाया जाएगा.

इससे पुल की चौड़ाई तीन फीट तक बढ़ जाएगी, जिससे वाहनों को मोड़ने के लिए अतिरिक्त जगह मिलेगी. इंजीनियरों की टीम मशीनों के साथ बुधवार को ब्रिज के सेंटर पॉइंट का मेजरमेंट करने भी पहुंची. 

18 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 648 मीटर लंबा ब्रिज घनी आबादी और बेतरतीब ट्रैफिक वाले ऐशबाग क्षेत्र में बनाया गया है. इसकी डिजाइन में 90 डिग्री का तीखा मोड़ होने से हादसों की आशंका जताई जा रही थी. 

तीन जांच टीमों ने दिए अहम सुझाव

सरकार ने इस फ्लाईओवर की सुरक्षा जांच के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की थीं, जिनकी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:

    एनएचएआई अधिकारी आरओ एस.के. सिंह ने सुझाव दिया कि ब्रिज पर 30 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार की अनुमति न हो, ब्रिज की दीवार ऊंची की जाए, सटीक संकेत और पर्याप्त लाइटिंग व्यवस्था हो, और फुटपाथ को तोड़कर ब्रिज में शामिल किया जाए।
    एमपीआरडीसी इंजीनियर ने सुझाव दिए कि बड़े वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए, जब तक चौड़ीकरण नहीं हो जाता, ब्रिज पर यातायात सीमित रखा जाए, तेज गति को रोकने के लिए रोड डिजाइन में परिवर्तन किया जाए, और जहां सड़कों का मिलन बिंदु है, वहां दीवार मोटी और ऊंची हो।
    इसके अलावा, इस बात पर भी विचार चल रहा है कि इस ब्रिज से केवल दोपहिया वाहनों को ही गुजरने की अनुमति दी जाए।

निर्माण में आईं तकनीकी चुनौतियाँ

इस ब्रिज के निर्माण में कई तकनीकी चुनौतियाँ थीं। एक ओर मेट्रो लाइन, दूसरी तरफ रेलवे लाइन और तीसरी तरफ स्टेडियम स्थित है। यह ब्रिज लगभग 5 लाख की आबादी की आवाजाही का मुख्य जरिया है। वर्ष 2022 में रेलवे ने राज्य सरकार से परामर्श किए बिना फाटक बंद कर दिया था, जिससे आवागमन बुरी तरह बाधित हुआ। इस आपातकालीन परिस्थिति में ब्रिज निर्माण का निर्णय लेना आवश्यक हो गया था।

अफसर ने कहा…

सरकार को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में कहा है कि 90 डिग्री मोड़ वाले फ्लाईओवर का निर्णय सामूहिक था, इसलिए किसी एक अभियंता की गलती नहीं मानी जा सकती। रेलवे ने भी निर्माण की विधिवत अनुमति दी थी।

नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव लोनिवि

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर यूजर मनीष चौधरी ने लिखा, "ये भोपाल का ऐशबाग रेल ओवर ब्रिज, जिसे PWD ने पूरे 10 साल में तैयार किया है, मानो कोई 'इंजीनियरिंग चमत्कार' हो. ऐसी संरचनाएं जनता की ज़रूरत नहीं, अधिकारियों की जेबें भरने के लिए बनाई जाती हैं. यह पुल न सिर्फ ट्रैफिक जाम का नया केंद्र बनेगा, बल्कि 90 डिग्री का ये मोड़ बड़े हादसे को न्योता देगा." 

 "मौत 90 डिग्री का कोण बना कर आएगी. डेवलपमेंट का यह एंगल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निकल कर आया है. 18 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं."

जब इस मुद्दे पर PWD मंत्री राकेश सिंह से पत्रकारों ने सवाल किया, तो उन्होंने कहा, "पुल बनने के बाद अचानक कुछ विशेषज्ञ आते हैं और इस तरह की बात करते हैं, जबकि कोई भी पुल बनाते समय कई तकनीकी पहलुओं को देखा जाता है. अगर ये कोई आरोप है, तो इसकी जांच कराई जाएगी."

अब रेलवे और पीडब्ल्यूडी के इस कदम से ब्रिज की सुरक्षा और ट्रैफिक सुगमता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

 

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