राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले को दी मंजूरी, आखिरी आदेश के पहले कर रहे इस बात का इंतजार, पुतिन ने भी दे दिया जंग पर बयान

वाशिंगटन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की योजना को मंजूरी दे दी है. उन्होंने फाइनल आदेश के लिए रुकने को कहा है. ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ एक अहम बैठक की. इस दौरान उन्होंने हमले को मंजूरी दी. उन्होंने कहा कि फाइनल आदेश के बाद हमला किया जाएगा, और इस दौरान उन्होंने यह देखने के लिए कहा कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने के लिए राजी है या नहीं.

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर का हवाला दिया है. रिपोर्ट में मीटिंग में शामिल तीन लोगों ने इस बारे में बताया है. रॉयटर्स ने जिस रिपोर्ट का हवाला दिया है उसमें कहा गया है, "राष्ट्रपति को उम्मीद है कि इजरायल के हमलों में शामिल होने की धमकी से तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ देगा."

ईरान के सुप्रीम लीडर की अमेरिका को चेतावनी

ट्रंप की मीटिंग से पहले ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई उनकी धमकियों को नकार चुके हैं, और ट्रंप को ही धमकी दी है कि अगर अमेरिका हमले में शामिल होता है तो उसके "बुरे परिणाम होंगे." उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी झुकेगा नहीं. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का करारा जवाब दिया जाएगा, जिससे अमेरिका को "अपूरणीय क्षति" होगी.

डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे "बिना शर्त सरेंडर" करने की मांग की थी. हालांकि खामेनेई ने कहा, "ईरान, ईरानी राष्ट्र और उसके इतिहास को जानने वाले बुद्धिमान लोग इस राष्ट्र से कभी भी धमकी भरी भाषा में बात नहीं करेंगे, क्योंकि ईरानी राष्ट्र सरेंडर नहीं करेगा."

अमेरिका को एक नई जंग में धकेलने का ट्रंप के समर्थक कर रहे विरोध

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले की मंजूरी तो दे दी है, लेकिन जिन ग्रुप्स ने उन्हें राष्ट्रपति बनने में मदद की, वे नहीं चाहते कि देश को मिडिल ईस्ट की एक नई जंग में धकेला जाए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को सत्ता में लाने वाले समर्थकों के बीच विभाजन पैदा हो गया है. उनके कुछ समर्थकों ने उनसे देश को मिडिल ईस्ट के नए युद्ध में शामिल न करने की अपील की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप के कुछ सबसे प्रमुख रिपब्लिकन सपोर्टर्स में शामिल शीर्ष लेफ्टिनेंट स्टीव बैनन ईरान पर हमले के विरोध में हैं. वे नहीं चाहते कि देश को मिडिल ईस्ट की नई जंग में शामिल किया जाए. रिपोर्ट के मुताबिक, वे ट्रंप के देश को आइसोलेट करने वाली नीतियों के समर्थक हैं.

ट्रंप और MAGA के समर्थक बैनन ने कहा कि इजरायल को 'जो शुरू किया था, उसे पूरा करने दें.' हालांकि, ट्रंप का कहना है कि उनके समर्थक उनसे प्यार करते हैं. रिपब्लिकन पार्टी में कुछ अन्य ऐसे नेता भी हैं जो ईरान के खिलाफ इजरायल के मिलिट्री कैंपेन में अमेरिका को शामिल करने का विरोध कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनके कुछ समर्थक "अब थोड़े नाखुश हैं" लेकिन अन्य लोग उनसे सहमत हैं कि ईरान परमाणु शक्ति नहीं बन सकता. ट्रंप ने कहा, "मैं युद्ध नहीं करना चाहता, लेकिन अगर उनके पास लड़ने या परमाणु हथियार रखने के बीच कोई विकल्प है, तो आपको वही करना होगा जो आपको करना है."

नेतन्याहू चाहते हैं ईरान के खिलाफ मिलिट्री कैंपेन में अमेरिका का समर्थन

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू चाहते हैं कि ट्रंप अमेरिका को ईरान के खिलाफ मिलिट्री कैंपेन में शामिल करें और उसके संभावित अंडरग्राउंड हथियार बनाने वाले न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म कर दें. इजरायल की वायु सेना ने पहले दावा किया है कि उसने फॉर्डो न्यूक्लियर साइट समेत, नतांज, इशफहान, कराज जैसे न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए हैं और नुकसान पहुंचाए हैं.

इजरायल का दावा है कि इनमें फॉर्डो साइट सबसे अहम है, जहां ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे इजरायली सेना नुकसान नहीं पहुंचा पा रही है. ट्रंप अगर हमले का अंतिम आदेश देते हैं तो संभव है कि अमेरिकी वायु सेना ईरान के अंडरग्राउंड Fordow न्यूक्लियर प्लांट पर B2 बॉम्बर से "बंकर बस्टर" बम गिरा सकती है, जिससे नेतन्याहू को उम्मीद है कि प्लांट को तबाह किया जा सकता है. इस बम का पेलोड 30 हजार पाउंड है, जिससे अंडरग्राउंड फैसिलिटीज को तबाह किया जा सकता है.

 

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