धार रेलवे स्टेशन का नाम राजा भोज पर होगा, केंद्रीयमंत्री सावित्री ठाकुर ने काम का निरीक्षण किया

 धार 

मप्र और गुजरात को आपस में जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल परियोजना (Indore-Dahod rail project) का कार्य तेज गति से चल रहा है। इसमें धार के समीप रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, पटरी बिछाने सहित अंडरपास, ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने दौरा कर निर्माण स्थल पहुंचकर जायजा लिया। साथ ही चल रहे निर्माण की क्वालिटी और कार्य प्रगति की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान ठाकुर ने रेलवे ब्रिज, अंडरपास और स्टेशन निर्माण की प्रगति देखी और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने के विजन को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।

आदिवासी क्षेत्रों को मिलेगा फायदा महू-धार से शुरू होकर यह लाइन झाबुआ, अलीराजपुर से होकर दाहोद (गुजरात) तक जाएगी। इससे मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच सीधी रेल सेवा शुरू होगी और आदिवासी बहुल इलाकों को आर्थिक विकास की नई राह मिलेगी।

यात्रा, रोजगार और व्यापार के बढ़ेंगे अवसर इस रेल परियोजना से स्थानीय लोगों को बेहतर यात्रा सुविधा तो मिलेगी ही, साथ ही रोजगार और छोटे व्यापारों को भी बढ़ावा मिलेगा। ठाकुर ने कहा कि इस क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए ही स्टेशन का नाम राजा भोज के नाम पर रखने की पहल की गई है।

धार स्टेशन का नाम रखा जाए राजा भोज स्टेशन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रेलवे की इस महती परियोजना से मप्र और गुजरात को आपस में जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि आदिवासी अंचलों के आर्थिक विकास और क्षेत्रीय समरसता को भी नई दिशा देगी। ठाकुर ने बताया कि धार के रेलवे स्टेशन का नाम राजा भोज के नाम से रखा जाए। इसलिए शीघ्र ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव भेजेंगे। उन्होंने मौके पर रेलवे का नक्शा सहित ड्राइंग और डिजाइन देखी और अफसरों को निर्देशित किया। इस मौके पर पश्चिम रेलवे के अधिकारी तपेश्वर राय सहित पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

धार में चल रहे ये प्रोजेक्ट्स
रेलवे द्वारा धार में नौगांव क्षेत्र में एक साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। दो किमी में रेलवे स्टेशन बन रहा है। जिसमें वेटिंग हॉल, टिकट घर सहित प्लेटफॉर्म शामिल है। इसी प्रकार इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर बायपास रोड पर रेलवे क्रॉसिंग के लिए दो रेल ओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं। सैकड़ों श्रमिकों के साथ मशीनों से दिनरात काम चल रहा है।

पटरी बिछाने का चल रहा कार्य
इंदौर से दाहोद के बीच अलग-अलग स्थानों पर रेलवे का कार्य चल रहा है। इसमें इंदौर से धार के बीच महत्वपूर्ण ट्रैक का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसमें पीथमपुर के समीप टिही टनल भी बनकर तैयार हो चुकी है। जहां अब पटरी बिछाने का कार्य चल रहा है। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि 2026 में इंदौर से धार के बीच ट्रेन का संचालन शुरु होगा।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति