टेस्ट ऑफ झाबुआ: सचिन चौहान की स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्रा

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सपनों को पंख देती प्रदेश सरकार की भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना

टेस्ट ऑफ झाबुआ: सचिन चौहान की स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्रा

सचिन चौहान  आज वे टेस्ट ऑफ झाबुआ हॉटल एंड रेस्टोरेंट के मालिक हैं,  स्थानीय लोगों के लिए स्वाद और आतिथ्य का केंद्र बना 
झाबुआ

झाबुआ जिले के छोटे से ग्राम किशनपुरी के सचिन चौहान ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और मध्य प्रदेश सरकार की भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना के सहयोग से न केवल अपनी जिंदगी संवारी, बल्कि जनजातीय युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए। शिक्षित होने के बावजूद बेरोजगारी का सामना कर रहे सचिन ने हार न मानते हुए अपने सपनों को हकीकत में बदला और आज वे “टेस्ट ऑफ झाबुआ हॉटल एंड रेस्टोरेंट” के मालिक हैं, जो स्थानीय लोगों के लिए स्वाद और आतिथ्य का केंद्र बन चुका है।

सचिन की कहानी उस युवा शक्ति की मिसाल है जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रोजगार संपन्न बनाने की ठानी है। सचिन ने संसाधनों की कमी के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प से नई राह बनाई है। झाबुआ जैसे जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में हॉटल और रेस्टोरेंट की जरूरत को पहचानकर उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता चुना। लेकिन सपनों को साकार करने के लिए पूंजी की जरूरत थी। इस चुनौती को पार करने के लिए सचिन ने मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ के कार्यालय का रुख किया। जहाँ उन्हें भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना की विस्तृत जानकारी मिली और हर कदम पर मार्गदर्शन दिया गया।

इस योजना के तहत सचिन को भारतीय स्टेट बैंक, राजवाड़ा शाखा, झाबुआ से 15 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने “टेस्ट ऑफ झाबुआ हॉटल एंड रेस्टोरेंट” की नींव रखी। आज यह हॉटल न केवल स्थानीय लोगों की पसंद बन चुका है, बल्कि सचिन को प्रतिमाह 45,000 से 50,000 रुपये की आय भी हो रही है। इस आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और अपनी इकाई के जरिए अन्य लोगों को रोज़गार के अवसर भी प्रदान कर रहे हैं। सचिन की सफलता ने आसपास के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित किया है, जो अब उनसे प्रेरणा लेकर अपने सपनों को साकार करने का हौसला जुटा रहे हैं।

सचिन अपनी इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी योजनाओं और मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम के मार्गदर्शन को देते हैं। वे कहते हैं, “यह योजना मेरे जैसे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिसने मुझे आत्मनिर्भर बनाया और मेरे सपनों को पंख दिए।”

भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना जनजाति वर्ग के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक प्रभावी मंच है। इस योजना के तहत 18 से 45 वर्ष की आयु के युवा, जो न्यूनतम 8वीं कक्षा उत्तीर्ण हों, आवेदन कर सकते हैं। योजना के अंतर्गत सेवा अथवा व्यवसाय के लिए राशि 1 लाख से 25 लाख रुपये तक तथा निर्माण इकाई के लिए राशि 1 लाख से 50 लाख रुपये तक का ऋण विभिन्न बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना न केवल आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देती है, बल्कि जनजातीय समुदायों के युवाओं को उनके कौशल और उद्यमिता के बल पर समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने में मदद करती है।

सचिन चौहान की यह कहानी हर उस युवा के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने की चाह रखता है। उनकी मेहनत और सरकार की इस योजना ने मिलकर यह साबित कर दिया कि सही दिशा और सहयोग मिले तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। सचिन आज न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि झाबुआ के युवाओं के लिए एक चमकता सितारा हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहा है।

 

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