PM मोदी को डिनर का न्योता मिला तो जिनपिंग भड़के, BRICS से बनाई दूरी!

ब्राजील
ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां जारी हैं। इसी बीच खबरें हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। कहा जा रहा है कि ब्राजील में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले राजकीय भोज के निमंत्रण के चलते जिनपिंग ने यह कदम उठाया है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। खास बात है कि एक दशक में यह पहला मौका होगा जब समिट में चीनी राष्ट्रपति मौजूद नहीं होंगे।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जिनपिंग सम्मेलन के लिए ब्राजील नहीं जाएंगे। अखबार से बातचीत में मामले के जानकार लोगों ने बताया है कि बीजिंग की तरफ से ब्राजील को बताया है कि जिनपिंग अपने शेड्यूल के कारण शामिल नहीं हो रहे हैं। उनके स्थान पर चीनी प्रधानमंत्री और शी के विश्वासपात्र ली क्विंग शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके अलावा एक वजह यह भी बताई जा रही है कि जिनपिंग एक साल से भी कम समय में ब्राजील के राष्ट्रपति लुईज इनाशियो लुला डा सिल्वा से दो बार मिल चुके हैं।

कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी साल 2020 में जिनपिंग रूस में हुई बैठक में वर्चुअली शामिल हुए थे। इसके बाद 2021 में चीन में आयोजित बैठक में भी वह रहे थे। बीजिंग में बुधवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने शी के फैसले के बारे में खबर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन की उपस्थिति के बारे में जानकारी उचित समय पर जारी की जाएगी।

पीएम मोदी को न्योता
पोस्ट से बातचीत में एक सूत्र ने बताया कि लुला ने मई में सद्भावना में बीजिंग की यात्रा की थी। उन्हें उम्मीद थी कि रियो सम्मेलन में शामिल होकर जिनपिंग भी ऐसा करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, अटकलें हैं कि लुला की तरफ से पीएम मोदी को दिया गए राजकीय रात्रि भोज के निमंत्रण के चलते चीन ने यह फैसला लिया होगा, क्योंकि कार्यक्रम में जिनपिंग एक 'सपोर्टिंग एक्टर' की तरह नजर आते। ब्रिक्स के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में ब्राजील 6-7 जुलाई को रियो डी जेनेरियो में उसके नियमित 17वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इस समूह का विस्तार पांच अतिरिक्त सदस्य देशों मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ किया गया है।

 

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