TATA Sons ने अहमदाबाद में एअर इंडिया दुर्घटना के पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने के लिए एक ट्रस्‍ट बनाया

मुंबई 

एयर इंडिया विमान हादसे के बाद देश की कॉर्पोरेट दुनिया से एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल सामने आई है। देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह टाटा संस ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले यात्रियों और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए 500 करोड़ रुपये की राशि से एक विशेष ट्रस्ट गठित करने का प्रस्ताव रखा है। यह ट्रस्ट शोकाकुल परिवारों की आर्थिक, सामाजिक और चिकित्सा जरूरतों को दीर्घकालिक सहायता प्रदान करेगा।
बोर्ड मीटिंग में रखा गया प्रस्ताव

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी “टाटा संस” ने 12 जून को अहमदाबाद में हुए भयावह विमान हादसे के पीड़ितों के लिए इस ट्रस्ट की स्थापना की दिशा में कदम बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने हाल ही में एक अंतरिम बोर्ड बैठक में ट्रस्ट के गठन और उसके उद्देश्यों को लेकर प्रस्तुति दी। कंपनी ने इस पहल के लिए 500 करोड़ रुपये की विशेष राशि के आवंटन की अनुमति मांगी है।
शुरू में था दो ट्रस्ट का विचार

सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह ने शुरुआत में दो अलग-अलग ट्रस्ट बनाने का विचार किया था—एक भारतीय नागरिकों के लिए और दूसरा लंदन-गंतव्य उड़ान में मारे गए विदेशी नागरिकों के परिजनों के लिए। लेकिन बाद में इन दोनों को समाहित कर एक एकीकृत ट्रस्ट के रूप में गठित करने की योजना बनाई गई ताकि सहायता समन्वित और व्यापक हो।
कहां खर्च होंगे 500 करोड़ रुपये?

इस ट्रस्ट के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये की राशि को कई प्रमुख मोर्चों पर उपयोग में लाया जाएगा

    दुर्घटना में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिवारों को मुआवज़ा।

    घायलों और पीड़ितों को दीर्घकालिक चिकित्सा सहायता।

    जिस मेडिकल कॉलेज पर विमान गिरा, उसकी पुनर्बहाली और संरचनात्मक सुधार।

    प्रभावित परिवारों की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को दीर्घकालिक सहायता।

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट का पंजीकरण शीघ्र होने की संभावना है और इसे एक संस्थागत ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा।
ट्रस्ट में विशेषज्ञों की भागीदारी

इस पूरी योजना की कमान टाटा मोटर्स के ग्रुप सीएफओ पी.बी. बालाजी को सौंपी गई है, जिनके पास कॉर्पोरेट प्रशासन, नियामकीय और वित्तीय मामलों में गहरा अनुभव है। ट्रस्ट की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए इसमें टाटा समूह के बाहर के अनुभवी विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। साथ ही, टाटा ट्रस्ट्स की ओर से भी आर्थिक व प्रशासनिक सहयोग दिए जाने की संभावना जताई गई है। बता दें  कि बोर्ड मीटिंग में नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह जैसे वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को समर्थन दिया।

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति