बच्चे की पढ़ाई पर डिजिटल नजर रखेगा निपुण ऐप

नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में बच्चों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा द्वारा निपुण ऐप को अपग्रेड किया गया है। इस डिजिटल माध्यम के जरिए अब शिक्षकों को हर सप्ताह अपनी कक्षा के कम से कम पांच छात्रों का मूल्यांकन करना अनिवार्य किया गया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई की प्रगति को रियल टाइम में ट्रैक करना है, जिससे शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावक और शैक्षिक अधिकारी भी लाभान्वित हो सकें।

विषयवार प्रश्न बैंक तैयार
कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए विषयवार प्रश्न बैंक तैयार किया गया है। इसमें ऐसे प्रश्न शामिल हैं जो छात्रों की समझ और सीखने की क्षमता को मापने में सहायक होंगे। ऐप में तीन स्तरों पर उपयोगकर्ता जोड़े गए हैं – शिक्षक, पर्यवेक्षक और मास्टर ट्रेनर। मूल्यांकन के दौरान हर छात्र को रेंडम आधार पर अलग-अलग प्रश्न मिलेंगे और उसके प्रदर्शन के आधार पर तुरंत शैक्षणिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

गुणवत्ता पर रखी जाएगी नजर
शिक्षकों को 25 सप्ताह की पूर्वनिर्धारित शिक्षण योजना के अनुसार मूल्यांकन करना होगा। इसके अतिरिक्त, एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन), डायट मेंटर्स और स्टेट रिसोर्स ग्रुप को 10 से 30 स्कूलों में जाकर सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करना होगा। इस दौरान कक्षा 1–2 के 40%, कक्षा 3–5 के 30% और कक्षा 6–8 के 20% बच्चों का मूल्यांकन करना होगा। यह आंकड़े ऐप में दर्ज किए जाएंगे, जिससे गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके।

निपुण ऐप रविवार और छुट्टियों में बंद रहेगा
निपुण ऐप रविवार और छुट्टियों में बंद रहेगा। साथ ही, एक बार दो विद्यालयों का मूल्यांकन हो जाने के बाद वह लॉक हो जाएगा, जिससे एक ही स्कूल का बार-बार मूल्यांकन न हो सके। पर्यवेक्षण के बाद संबंधित शिक्षक को जरूरी फीडबैक और रिमेडियल प्लान देना अनिवार्य किया गया है, ताकि कमजोर छात्रों को आगे बढ़ाया जा सके।

ऐप का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश
राज्य परियोजना निदेशक कंचन वर्मा ने सभी बीएसए और प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे अपने स्तर पर ऐप का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करें। इस उद्देश्य के लिए निपुण ऐप का यूजर मैनुअल भी जारी कर दिया गया है। ऐप से प्राप्त डेटा का उपयोग बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारियों की बैठकों में समीक्षा के लिए किया जाएगा।

 

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