नवाचारों की श्रंखला में हरदा जिले में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का संयुक्त “हृदय अभियान” आदर्श उदाहरण साबित हुआ

विकास प्रक्रियाओं में बढ़ा नवाचार

हरदा का हृदय अभियान बना आदर्श उदाहरण, राज्य नीति आयोग ने की सराहना

नवाचारों की श्रंखला में हरदा जिले में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का संयुक्त "हृदय अभियान" आदर्श उदाहरण साबित हुआ

हृदय अभियान की राज्य नीति आयोग ने भी सराहना की, जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा 

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर विकास प्रक्रियाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। नवाचारों की श्रंखला में हरदा जिले में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का संयुक्त "हृदय अभियान" आदर्श उदाहरण साबित हुआ। राज्य नीति आयोग ने भी इस अभियान की सराहना की है। जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

हरदा जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा शैक्षिक सेवाओं को "हृदय अभियान" के अंतर्गत माताओं, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाया गया। सभी हितग्राही माताएँ और 18 वर्ष तक के बच्चों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाया गया। मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु के आंकड़ों में कमी लाने और कुपोषण को कम करने के लिये एक साथ विशेष गतिविधियां चलाई गई। इसके लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर जानकारी प्रदान करना, गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना और बालक-बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां चलाई गई। ऐसे गांवो का चयन किया गया जिनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा संबंधी सूचकांक पिछले कुछ वर्षों में न्यूनतम रहे।

कैसे हुई हृदय अभियान की शुरुआत

जिले में नवाचार के रूप में कुपोषण मुक्त करने और जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा तथा स्वास्थ्य की सुविधाओं की पहुंच बच्चों और महिलाओं तक बढ़ाने के उद्देश्य से हृदय अभियान चलाया गया। दूर दराज के 50 गांवों को चिन्हित किया गया, जिनमें गर्भवती माताओं और बच्चों की समस्या दूसरे गांवों की अपेक्षा ज्यादा थी। स्वास्थ्य, महिला बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभागों का संयुक्त सर्वे कराया गया। संयुक्त दल ने डोर-टू-डोर सर्वे कर रिपोर्ट दी।

गर्भवती माताओं का पंजीयन, टीकाकरण और हाई रिस्क महिलाओं का प्रबंध ग्राम और संस्था स्तर पर किया गया। जननी सुरक्षा योजना, प्रसूति सहायता योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी तथा भुगतान संबंधी समस्याओं का शिविर लगाकर निराकरण किया गया। पोषण सलाह, आयरन टेबलेट, कैल्शियम टेबलेट उपलब्ध कराई। सर्वे में प्राप्त कुपोषण प्रभावित बच्चों के लिए विशेष पोषण प्लान तैयार किया गया। शाला त्यागी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए फील्ड स्तर पर जनशिक्षक, प्रधानाध्यापकों के माध्यम से प्रोत्साहित किया गया।

"हृदय अभियान" का परिणाम यह रहा कि बच्चों में कुपोषण से मुक्त कराने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार, शाला त्यागी बच्चों को पुनः शाला में प्रवेश दिलाने में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

पोषण स्तर में सुधार के लिए ग्रेन्यूल फॉर्म में कुपोषित बच्चों को फ्लेवर मुनगा ग्रेन्यूल पाउडर 10 ग्राम, दूध पाउडर 10 ग्राम के साथ प्रतिदिन दो बार दिया गया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा अति कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाया गया। इस प्रकार 225 कुपोषित बच्चों में सुधार हुआ।

स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित 739 गर्भवती माताओं का बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया। उनके समग्र आईडी बनाए गए। बैंकों में खाते खुलवाए गए। संस्थान प्रसवों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई।

स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन से ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हुई। टीकाकरण कार्यक्रम में चिन्हित गांवों के बच्चों को टीके लगाए गए। इनमें 38 बच्चे टिमरनी, 26 खिरकिया और 29 बच्चे हंडिया ब्लॉक में हैं। स्वास्थ्य के अलावा 1752 शाला त्यागी बच्चों में से 562 को पुनः शाला में प्रवेश कराया गया।

 

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