डीजीपी का बयान: लंबे अभियान के बाद आतंकियों पर कसा शिकंजा

चेन्नई
महीनों तक जारी अभियान और आंध्र प्रदेश व कर्नाटक पुलिस के साथ समन्वय के बाद तमिलनाडु आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने पिछले कुछ दिनों में तीन संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शंकर जीवाल ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि गिरफ्तार किए गए अबूबकर सिद्दीकी, मोहम्मद अली और सादिक उर्फ टेलर राजा लगभग तीन दशक से फरार थे और पुलिस लगातार उनका पीछा कर रही थी। इन अभियानों को 'आराम' और 'आगाज़ी' नाम दिया गया था।

तीनों व्यक्ति 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाकों और 2013 में बेंगलुरु के मल्लेश्वरम बम विस्फोट सहित कई मामलों में वांछित हैं। कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाका मामले में 58 लोग मारे गए थे और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

उन्होंने बताया कि संदिग्धों को पकड़ने के लिए पिछले लगभग छह महीने में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के पुलिस बलों के साथ मिलकर दो अभियान चलाए गए।

सिद्दीकी और अली को आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से पकड़ा गया जबकि सादिक को कर्नाटक के विजयपुरा से गिरफ्तार किया गया। पुलिस प्रमुख ने कहा, ''आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने बहुत ही पेशेवर और सफल अभियान चलाया है… जांच जारी है।'' गिरफ्तार किए गए लोग किराना दुकान, दर्जी की दुकान चलाने और रियल एस्टेट जैसे व्यवसायों से जुड़े थे।

चूंकि उन्हें इतने साल के बाद गिरफ्तार किया जाना था इसलिए पुलिस ने उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए ''कुछ मापदंडों'' का इस्तेमाल किया। जिवाल ने कहा, ''हिरासत के 24 घंटे के भीतर उनकी पहचान की पुष्टि हो गई।'' उन्होंने कहा कि सिद्दीकी और अली किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़े प्रतीत नहीं होते, लेकिन सादिक के प्रतिबंधित अल-उम्मा समूह का हिस्सा होने का संदेह है। उनकी संभावित विदेश यात्राओं सहित विभिन्न विवरणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

 

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