ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज : सीरीज गंवाने के बाद सम्मान बचाने उतरेगी कैरेबियाई टीम

नई दिल्ली
ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच शनिवार देर रात तीसरे टेस्ट मैच की शुरुआत होने जा रही है। ऑस्ट्रेलिया तीन मुकाबलों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना चुका है। ऐसे में जमैका में खेला जाने वाला सीरीज का यह अंतिम टेस्ट मैच मेजबान टीम के लिए सम्मान की लड़ाई होगा।

यह ‘पिंक बॉल टेस्ट’ मैच है, जो भारतीय समयानुसार शनिवार देर रात शुरू होगा। गुलाबी गेंद टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा रहा है। ऐसे में कैरेबियाई टीम के सामने बड़ी चुनौती है।

इससे पहले, ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बारबाडोस में खेले गए पहले टेस्ट को 159 रन से अपने नाम किया था। ग्रेनेडा में खेले गए दूसरे मुकाबले को 133 रन से जीतकर सीरीज पर कब्जा कर लिया।

ऑस्ट्रेलिया की ओर से इस सीरीज में ट्रेविस हेड ने चमक बिखेरी है, जिन्होंने चार पारियों में 47 की औसत के साथ 188 रन बनाए हैं। हेड सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं।

हेड के अलावा एलेक्स कैरी, उस्मान ख्वाजा और बीयू वेबस्टर वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को परेशान कर सकते हैं। इनके अलावा पैट कमिंस, जोश हेजलवुड और नाथन लियोन टीम की गेंदबाजी को मजबूती देते हैं।

वहीं, वेस्टइंडीज के खेमे को देखें, तो ब्रैंडन किंग, शमर जोसेफ, रोस्टन चेज और शाई होप के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को विशेष रणनीति के साथ उतरना होगा। गेंदबाजी में मेजबान टीम के पास शमार जोसेफ जैसे तेज गेंदबाज हैं, जिन्होंने सीरीज में अब तक 14 विकेट चटकाए हैं। इनके अलावा जायडेन सील्स और अल्जारी जोसेफ भी ऑस्ट्रेलिया के लिए खतरा बन सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच साल 1930 से अब तक कुल 122 टेस्ट मैच खेले गए हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी रहा है। इस टीम ने 63 मुकाबले अपने नाम किए, जबकि वेस्टइंडीज ने 33 मैच जीते हैं। दोनों देशों के बीच 25 टेस्ट ड्रॉ, जबकि एक मैच टाई रहा है।

सबीना पार्क की पिच स्लो रह सकती है। यहां गेंदें नीची रहेंगी, जिससे बल्लेबाजों को मदद मिलेगी। इस मैच के दौरान सबसे बड़ी चुनौती नई ड्यूक्स गेंद से निपटना होगा। यहां मुकाबले की शुरुआत में तेज गेंदबाज सीम मूवमेंट और स्विंग हासिल कर सकते हैं। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, पिच धीमी होने लगेगी, जिससे स्पिनर्स को मदद मिल सकती है।

वेस्टइंडीज : क्रेग ब्रैथवेट, जॉन कैंपबेल, कीसी कार्टी, ब्रैंडन किंग, रोस्टन चेज (कप्तान), शाई होप (विकेटकीपर), जस्टिन ग्रीव्स, अल्जारी जोसेफ, शमर जोसेफ, एंडरसन फिलिप, जायडेन सील्स, जोमेल वारिकन, टेविन इमलाच, केवलॉन एंडरसन, मिकाइल लुइस, जोहान लेयने।

ऑस्ट्रेलिया : सैम कोंस्टास, उस्मान ख्वाजा, कैमरून ग्रीन, स्टीव स्मिथ, ट्रैविस हेड, बीयू वेबस्टर, एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), पैट कमिंस (कप्तान), मिचेल स्टार्क, नाथन लियोन, जोश हेजलवुड, सीन एबॉट, स्कॉट बोलैंड, मार्नस लाबुशेन, जोश इंगलिस, मैथ्यू कुहनेमैन।

 

  • admin

    Related Posts

    AUS vs PAK क्लैश: विश्व कप वार्म-अप में कौन दिखाएगा असली दम?

    नई दिल्ली टी20 विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच 3 मैच की सीरीज गुरुवार से शुरू हो रही है। इसके जरिए पाकिस्तानी टीम को विश्व कप की…

    तारीफ कम पड़ेगी — अभिषेक शर्मा ने पावर हिटिंग में क्रिस गेल को छोड़ा पीछे, कैफ का बड़ा बयान

    नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा है कि वह निरंतरता के साथ आक्रामक बल्लेबाजी के…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति