सूख चुकी थी पहचान, अब फिर बह रही नून नदी की धार

लखनऊ/कानपुर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कानपुर में सूख चुकी नून नदी अब फिर से बहने लगी है। एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया है कि एक समय कानपुर की नून नदी का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो चुका था, यह नक्शे से गायब हो गई थी, गाद से भरी रहती थी, अतिक्रमण की जद में थी लेकिन अब इसकी जलधारा फिर से बहने लगी है। इसमें कहा गया, ‘‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता के कारण ऐसा हुआ है जिन्होंने 'एक जिला-एक नदी' पहल के माध्यम से राज्य की मृतप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने के लिये अभियान शुरू कराया।'' बयान के मुताबिक नून नदी न केवल कानपुर नगर के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक आदर्श बन चुकी है।

इसमें कहा गया, ‘‘नून नदी कभी बिल्हौर, शिवराजपुर और चौबेपुर के खेतों को सींचती थी, ग्रामीण संस्कृति का अभिन्न हिस्सा थी लेकिन उपेक्षा की शिकार इस नदी में न तो पानी बचा था, न कोई पहचान रह गई थी। अतिक्रमण और गाद ने जलधारा को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया था।'' मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर नून नदी को 'एक जिला-एक नदी' योजना में शामिल किया गया। कानपुर के जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन के नेतृत्व में इस कार्य को एक सरकारी योजना से अधिक जनभागीदारी अभियान बनाया गया। बयान में कहा गया, ‘‘करीब 48 किलोमीटर लंबी नून नदी का पुराना रास्ता खोजने में राजस्व अभिलेख, ग्रामीणों की यादें, ड्रोन सर्वेक्षण और उपग्रह की तस्वीरों का सहारा लिया गया। मनरेगा योजना के तहत सफाई, खुदाई, गाद निकासी और तटबंध निर्माण का कार्य फरवरी से आरंभ हुआ।''

इसमें कहा गया कि 6,000 श्रमिकों ने 58 ग्राम पंचायतों से मिलकर करीब 23 किलोमीटर की खुदाई और सफाई का कार्य किया तथा इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 57 लाख रुपये खर्च हुए। बयान के अनुसार मुख्यमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप जुलाई के पहले सप्ताह में नदी के दोनों तटों पर 40,000 से अधिक पौधे रोपे गए जिनमें नीम, पीपल, पाकड़, सहजन जैसे वृक्ष प्रमुख हैं।

 

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