गांव में पुजारी का बहिष्कार, बच्चों की शिक्षा बनी राजनीति का शिकार

उज्जैन
बड़नगर तहसील के पीर झलार गांव में खाप पंचायत जैसा मामला सामने आया है। यहां मंदिर में हुई सामाजिक बैठक में पुजारी और उसके परिवार का बहिष्कार कर दिया गया। सुनाए गए फैसले में बच्चों की पढ़ाई से लेकर पूजन, मजदूरी, घर के आसपास सफाई तक पर रोक लगा दी गई। फैसले का उल्लंघन करने पर 51 हजार रुपये जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।
 
मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश
जानकारी के अनुसार पीर झलार गांव में करीब 300 साल पुराना देव धर्मराज मंदिर है। पूनमचंद चौधरी उर्फ पूनाजी यहां पुजारी हैं। मंदिर की करीब सात बीघा जमीन पर पुजारी खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। चौधरी के मुताबिक कुछ ग्रामीण मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर चंदा इकट्ठा कर लिया। उसी राशि से मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पुजारी परिवार ने विरोध किया।

पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया
पुजारी के बेटे मुकेश चौधरी ने बताया कि विरोध के बाद उन्हें और परिवार को निशाना बना लिया। गांव के प्रभावशाली लोगों ने 14 जुलाई को पंचायत बुलाकर बहिष्कार का फरमान सुना दिया। गांव के नागराज मंदिर परिसर में पूर्व सचिव गोकुल सिंह देवड़ा ने पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीण बैठे नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद पुजारी पूनमचंद चौधरी ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह से शिकायत की है।

पुजारी परिवार के तीन बच्चों को स्कूल से निकाला
पुजारी के बेटे मुकेश ने बताया कि उसके तीन बच्चे 13 वर्षीय संध्या (आठवीं), 10 वर्षीय सतीश (पांचवीं) और छह वर्षीय विराट (तीसरी कक्षा) निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। पंचायत के फैसले के बाद तीनों को स्कूल से निकाल दिया गया है। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि आपके परिवार का विवाद चल रहा है, इसलिए हम बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। 'पुजारी परिवार की शिकायत पर जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंदिर का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।' रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर

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