नागचंद्रेश्वर मंदिर: दर्शन का समय घोषित, इस बार बढ़ेगा श्रद्धालुओं का प्रवेश और सुविधा

उज्जैन

उज्जैन में श्रावण मास (shravan month) के पावन अवसर पर आगामी मंगलवार 29 जुलाई को नागपंचमी पर्व के उपलक्ष्य में श्री महाकालेश्वर मंदिर (mahakal mandir) के मुख्य शिखर में विराजमान नागचंद्रेश्वर मंदिर (nagchandreshwar mandir darshan) के पट खुलेंगे। दर्शन का सिलसिला 28 जुलाई की रात 12 बजे शुरु होकर अगले दिन 29 जुलाई की रात 12 बजे खत्म होगा। इस विशेष दिन पर लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्ष में केवल एक दिन के लिए दर्शनार्थ खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन का सौभाग्य सभी प्राप्त हो, इसके लिए अधिकारियों ने बैठक बुलाई।

ये है मंदिर खुलने और बंद होने का समय

जिला और मंदिर प्रशासन के अनुसार 28 जुलाई की रात 12 बजे से 29 जुलाई की रात 12 बजे तक मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना जताई जा रही है। पर्व की तैयारियों को लेकर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसपी प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, महंत विनीत गिरि, नगर निगम, स्वास्थ्य, पीएचई, लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं के लिए होंगी ये व्यवस्थाएं

    एयरो ब्रिज का तकनीकी परीक्षण कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बनाए गए एयरो ब्रिज की तकनीकी क्षमता और मजबूती की जांच कर प्रमाण-पत्र लिया जाए।

    साफ-सफाई एवं पेयजल व्यवस्था मंदिर परिसर और उसके आसपास नगर निगम द्वारा सफाई सुनिश्चित की जाएगी।

    साथ ही पेयजल पाइंट, टैंकर, और मोबाइल लॉकर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

    दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हील चेयर, जूता स्टैंड और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जाएगी।

    यातायात, पार्किंग एवं सुरक्षा पार्किंग के लिए कर्कराज पार्किंग, बड़ा गणेश, और अन्य स्थानों पर समुचित व्यवस्था की जाएगी। दर्शन मार्ग पर बैरिकेडिंग, पुलिस बल, और फायर स्टेशन, खोया-पाया केन्द्र भी तैनात किए जाएंगे।

दर्शन मार्ग निर्धारित

    श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग में वाहन पार्क कर, भील समाज धर्मशाला में जूते उतारेंगे।

    वहां से गंगा गार्डन, चारधाम पार्किंग, हरसिद्धि चौराहा, रुद्रसागर की दीवार, विकम टीला, बड़ा गणेश मंदिर होते हुए द्वार कमांक- 4 से प्रवेश करेंगे।

    दर्शन के उपरांत विश्रामधाम, एयरो ब्रिज, मार्बल गलियारा से होते हुए हरसिद्धि चौराहा की ओर निकलेंगे।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति