मंगला गौरी व्रत 2025: सावन के दूसरे मंगलवार को ऐसे करें मां की उपासना

सावन माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है. इस दिन मां पार्वती की आराधना की जाती है. इस दिन सुहागिन महिलाएं मां पार्वती के लिए व्रत करती हैं. मंगला गौरी व्रत और भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. साल 2025 में सावन माह में कुल 4 मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे. 22 जुलाई, 2025 मंगलवार को पड़ने वाला मंगला गौरी व्रत द्वादशी तिथि के दिन पड़ेगी. इस दिन कामिका एकादशी व्रत का पारण भी किया जाएगा.

सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत बहुत विशेष होने वाला है. इस दिन कई पर्व, वार का संयोग बन रहा है. मंगला गौरी का व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है जो हनुमान जी का दिन है, साथ ही इस दिन कामिका एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा. साथ ही सावन माह का पहला प्रदोष व्रत भी 22 जुलाई को रखा जाएगा. इस प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा.

सावन 2025 दूसरा मंगला गौरी व्रत
सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:14 मिनट से लेकर 04:56 तक रहेगा. यह समय स्नान के लिए श्रेष्ठ है. दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:55 तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 02:44 से दोपहर 03:39 तक रहेगा.

मंगला गौरी व्रत का महत्व
    सावन में सुहागन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं मंगला गौरी का व्रत रखती हैं. इस व्रत को करने से पति की आयु बढ़ती हैं और स्वास्थ्य अच्छा रहता है. साथ ही शादीशुदा जीवन में खुशियों का आगमन होता है.
    मंगला गौरी का व्रत वो कन्याएं भी रख सकती हैं जिनके विवाह में कोई बाधाएं आ रही हो या दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हो.

 

  • admin

    Related Posts

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति