करोड़ों की कमाई, सस्पेंस बरकरार: सौरभ शर्मा की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

भोपाल
 जबलपुर हाईकोर्ट में  आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल से करोड़पति बिल्डर बने सौरभ शर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। ईडी ने सौरभ शर्मा और उनके परिवार के सदस्यों समेत 12 लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है, जिसके बाद शर्मा 4 फरवरी से न्यायिक हिरासत में हैं। जिला न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शर्मा ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

12 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज है मामला
हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं। लोकायुक्त ने आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के घर पर दबिश दी थी। बेनामी संपत्ति मिलने पर ईडी ने सौरभ शर्मा सहित उसके पारिवारिक सदस्यों समेत 12 व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।

4 फरवरी से पुलिस की अभिरक्षा में है सौरभ
आरोपी सौरभ शर्मा विगत 4 फरवरी से न्यायिक अभिरक्षा में है। ईडी द्वारा दर्ज प्रकरण में जिला न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान सौरभ शर्मा के वकील ने दलील दी कि ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्ति सौरभ शर्मा के नाम पर नहीं है और उनका उन संपत्तियों से कोई लेना-देना नहीं है।

108 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच
ईडी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विक्रम सिंह ने अदालत को बताया कि सह-आरोपियों का कहना है कि सौरभ शर्मा ने उनके नाम पर उक्त संपत्तियां खरीदी हैं। ईडी के अधिवक्ता ने एकलपीठ को बताया कि 108 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है, जिसे सौरभ शर्मा ने सह-आरोपियों के नाम पर खरीदा था। अटैच की गई संपत्ति से संबंधित एक सिविल प्रकरण दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। आरोपी सौरभ शर्मा द्वारा अवैध रूप से अर्जित धन से उक्त संपत्तियां खरीदी गई थीं।

जिला न्यायालय में खारिज हुई थी जमानत अर्जी
मामला तब शुरू हुआ जब लोकायुक्त ने आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के घर पर छापा मारा और बेनामी संपत्ति का पता लगाया। इसके बाद, ईडी ने शर्मा, उनके परिवार और 12 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। शर्मा को 4 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। शर्मा ने जिला न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की।

 

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