मेट्रो के रास्ते में बाधा: भोपाल में हटाए जाएंगे धार्मिक स्थल और निजी संपत्तियां

भोपाल

 भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को पूरा करने बड़ी संख्या में वैध-अवैध निर्माणों को हटाने की योजना तैयार हो गई है। करोद से एम्स व रत्नागिरी से भदभदा तक करीब 30 किमी लंबाई के ट्रैक के लिए कुल 1342 संपत्तियों को हटाना होगा। इनमें 34 धार्मिक स्थल, 21 टॉयलेट्स, 19 बस स्टॉप भी शामिल है।

मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने इन्हें हटाने प्रशासन को सूची सौंपी है। मेट्रो का काम तेजी से पूरा करने कॉर्पोरेशन को 52 हजार 863 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है। गौरतलब है कि प्रोजेक्ट में 12.3 हेक्टेयर सरकारी जमीन के साथ 2.7 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण अभी ओर होगा। 446.87 करोड़ रुपए का पुनर्विस्थापन बजट तय किया हुआ है।

ऐसे समझे मेट्रो लाइन

    करोंद से एम्स लाइन- 16.546 किमी लंबाई। 14 एलीवेटेड स्टेशन, दो अंडरग्राउंड स्टेशन।

    भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक– 14.164 किमी लंबाई। 14 रेलवे स्टेशन एलीवेटेड।

    दो लाइन की कुल लंबाई- 30.170 किमी है। 30 मेट्रो स्टेशन कुल

ऐसे आंकड़ों में समझे प्रभावित संपत्तियां

    1342 कुल प्रभावित
    809 सरकारी
    533 निजी
    1218 पूरी तरह से प्रभावित
    124 आंशिक प्रभावित
    1563 मकान प्रभावित
    373 मकान टाइटल होल्डर
    1190 नॉन टाइटल होल्डर
    496 अपना पूरा मकान खो देंगे
    514 की पूरी दुकान जाएगी
    133 पूरे मकान-दुकान खोएंगे
    04 खुले प्लॉट
    195 कम्युनिटी संपत्तियां
    52 हजार 863.85 वर्गमीटर क्षेत्र प्रभावित
    26 हजार 617.3 वर्गमीटर टाइटल होल्डर्स की
    26 हजार 246.55 वर्गमीटर नॉन टाइटल होल्डर की

सुभाष ब्रिज से करोंद तक इन्हें हटाना टेढ़ी खीर

    18 संपत्तियां पुल बोगदा
    44 संपत्तियां एशबाग
    23 संपत्तियां अंडरग्राउंड टनल के एंट्री रैंप के लिए
    103 संपत्तियां भोपाल स्टेशन
    45 संपत्तियां नादरा बस स्टैंड
    108 संपत्तियां सिंधी कॉलोनी
    15 संपत्तियां डीआइजी बंगला
    06 संपत्तियां कृषि मंडी
    36 संपत्तियां करोंद
    95 संपत्तियां अर्जुन नगर

प्रभावित संपत्तियां के प्रकार समझे

    34 धार्मिक स्थल
    03 कार्यालय
    19 बस स्टॉप
    21 टॉयलेट
    04 रेलवे केबिन
    36 बाउंड्रीवॉल
    02 फैक्ट्री
    03 पुलिस चौकी
    07 वाटर टैंक
    19 पुलिस क्वार्टर
    02 कम्युनिटी हॉल
    13 सरकारी भवन

राजधानी भोपाल को मिलेगी अत्याधुनिक मेट्रो, 90km प्रति घंटे की रफ्तार, 7000 करोड़ की होगी लागत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरकेएमपी स्टेशन पर भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल मेट्रो मध्य प्रदेश की प्रगति का प्रतीक है. इस परियोजना को कुल 6941.40 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है.

सुभाष नगर स्टेशन से एम्स स्टेशन तक अनुमानित 2225 करोड़ की लागत से प्रायोरिटी कॉरिडोर बनाया जा रहा है. इसका कार्य अंतिम चरण में है. अक्टूबर 2025 तक इस प्रायोरिटी कॉरीडोर में मेट्रो ट्रेन का संचालन शुरू कर देना सरकार का लक्ष्य है. भोपाल मेट्रो के दोनों कॉरिडोर्स (ऑरेंज और ब्लू लाइन) साल 2030 से पहले पूर्ण रूप से चालू कर देने का हमारा रोडमैप तैयार है.
 
भोपाल मेट्रो की डिजाइन 
भोपाल में चलने वाली मेट्रो की स्पीड 90 किमी प्रति घंटा होगी. इसकी ऑपरेशनल स्पीड 40-60 किमी घंटा होगी. हर मेट्रो स्टेशन के बीच मात्र 2 मिनट का समय लगेगा. मेट्रो में यात्रियों के लिए एस्केलेटर, लिफ्ट, ब्रेल साईनेज, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय और त्वरित सूचनाएं देने की सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं होंगी.

भोपाल मेट्रो में दिव्यांगों के लिए पूरी सुविधा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार मेट्रो ट्रेन में दिव्यांगजनों के लिए भी पूरी तरह से समावेशी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है. 
सभी मेट्रो स्टेशन्स पर दिव्यांगजनों के लिए सुगम आवागमन की सुविधाएं होंगी. 

मेट्रो से कंट्रोल होगा प्रदूषण
भोपाल मेट्रो ट्रेन परियोजना के लिए कुल 27 अत्याधुनिक मेट्रो ट्रेन सेट होंगे. इनमें से 7 ट्रेन सेट भोपाल पहुंच चुके हैं. मेट्रो से न केवल सुविधाजनक यात्रा ही संभव होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी इसकी प्रभावी भूमिका होगी. 

इंदौर मेट्रो का काम भी होगा पूरा
इंदौर मेट्रो का पूरा सेक्शन इसी साल के अंत तक प्रारंभ करने की तैयारी हो रही है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर मेट्रो ट्रेन के शेष कार्यों की प्रगति की जानकारी भी मीडिया को दी. उन्होंने कहा कि इंदौर में मेट्रो ट्रेन की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं. सरकार का लक्ष्य है कि इंदौर मेट्रो का पूरा सेक्शन, जो सुपर कॉरीडोर से मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन चौराहा) तक इसी साल के अंत तक प्रारंभ हो जाए. इससे इंदौर शहरवासियों को पूर्ण मेट्रो ट्रेन सुविधा मिल सकेगी.

सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि इंदौर और भोपाल में विश्वस्तरीय मेट्रो ट्रेन सेवा समय पर शुरू हो, जिससे आमजन को सार्वजनिक परिवहन का एक सरल, सहज, सुगम, बेहतर और सुरक्षित माध्यम मिल सके.

सीएम ने की मेट्रों की सैर, अक्टूबर में संचालन शुरू करने पर जोर

भोपाल मेट्रो में  सीएम डॉ. मोहन यादव ने सवारी की। मेट्रो 35 से 40 किमी प्रतिघंटा की गति से चली और गणेश मंदिर रेलवे ओवरब्रिज को पार कर एम्स तक पहुंची। स्टेशन से रवाना मेट्रो एम्स तक पहुंची और तुरंत रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन पर लौट आई। सीएम बताया कि हमारी मेट्रो कमर्शियल रन के लिए तैयार है। अक्टूबर में प्रधानमंत्री नन्द्र मोदी से समय मांगा है। जो समय मिलेगा, उसपर कमर्शियल यानि यात्रियों के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति