आतिशी पर जांच की तलवार! CM ने बारापूला एलिवेटेड परियोजना की जांच के दिए निर्देश

नई दिल्ली

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि उनके पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए 175 करोड़ रुपये के एक भुगतान की जांच के लिए दिल्ली सरकार ने एसीबी को निर्देशित किया है। सोमवार को वित्त व्यय समिति की बैठक में बारापुला एलिवेटेड रोड  फेज तीन के इस भुगतान की जांच का निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी सामने आया कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार की लापरवाही के कारण ठेकेदार कंपनी को यह राशि दी गई। इस परियोजना से संबंधित लोक निर्माण विभाग की लापरवाही पर भी चर्चा की गई, जिसमें मंत्री प्रवेश वर्मा भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना को शीघ्रता से पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धनराशि का भुगतान इसलिए किया गया, क्योंकि पूर्व सरकार ने कंपनी को कार्य करने की अनुमति नहीं दी थी।

यह परियोजना एक एलिवेटेड रोड के निर्माण की है, जो बारापूला नाले से शुरू होकर सराय काले खां होते हुए मयूर विहार फेज-III तक पहुंचेगी। इस उच्चस्तरीय बैठक में PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री को बताया गया कि परियोजना जल्द ही प्रगति करेगी, क्योंकि मार्ग में आने वाले पेड़ों को हटाने की अनुमति शीघ्र मिलने वाली है, जिससे परियोजना समय पर पूरी हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए और सरकार इस परियोजना के लिए बजट की कमी नहीं होने देगी। परियोजना के सफलतापूर्वक पूरा होने से दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली के बीच यातायात सुगम हो जाएगा।  

परियोजना: सराय काले खां से मयूर विहार तक बारापूला एलिवेटेड रोड (फेज-III) को दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने सितंबर 2011 में मंजूरी दी थी। इसके लिए 1260.63 करोड़ रुपये का बजट दिसंबर 2014 में आवंटित किया गया। परियोजना का कार्य अप्रैल 2015 से आरंभ हुआ, जिसे 30 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्रारंभिक लागत 1260.63 करोड़ रुपये थी, जिसमें से अब तक 1238.68 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अनुमानित कुल लागत 1330 करोड़ रुपये होने की संभावना है, और वर्तमान में 87 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। पेड़ों को जल्द हटाने की अनुमति मिलने के बाद परियोजना में तेजी आएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से जून 2025 तक 86.43 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

रेखा गुप्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व सरकार ने ठेकेदार कंपनी को 175 करोड़ रुपये का भुगतान किया. उस समय आप सरकार में आतिशी पीडब्ल्यूडी मंत्री थीं. मुख्यमंत्री के अनुसार, पूर्व सरकार ने न तो कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की और न ही अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की. इस राशि का भुगतान करने के कारण पीडब्ल्यूडी की अन्य योजनाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा.

मुख्यमंत्री के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि उस समय ठेकेदार कंपनी ने 35 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसके बदले में वह विवाद को आगे नहीं बढ़ाने के लिए तैयार थी. हालांकि, जब यह राशि नहीं दी गई, तो मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच गया.

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अनियमितता में पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता की संभावना है. उन्होंने सतर्कता जांच में उनके कार्यों की भी समीक्षा कराने का निर्णय लिया है. सीएम ने कहा कि सरकार जल्द ही एसीबी जांच के लिए फाइल एलजी को अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगी. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस जांच से परियोजना पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकार ने पहले ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर दिया है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस परियोजना को शीघ्रता से पूरा किया जाए, और बारापुला फेज तीन के शेष हिस्से के लिए पेड़ काटने की अनुमति भी जल्द मिलने वाली है.

आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा-शासित दिल्ली सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए शासन छोड़ने की मांग की है. पार्टी ने एक बयान में भाजपा की चार इंजन वाली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता में आने के छह महीने बाद भी वह अपने वादों को पूरा करने में असफल रही है. आप ने यह भी कहा कि भाजपा विकास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ निराधार मुकदमे दर्ज करने और छापेमारी करने में व्यस्त है. पार्टी ने स्पष्ट किया कि चाहे कितने भी मामले दर्ज किए जाएं या किसी को जेल में डाला जाए, इससे कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि सच्चाई को छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय आम आदमी पार्टी की सरकार में आतिशी PWD मंत्री थीं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के भ्रष्टाचार की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायर नहीं की और न ही अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। इस दौरान, कंपनी को भुगतान करने के कारण PWD की अन्य योजनाएं भी प्रभावित हुईं। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी को यह राशि इसलिए दी गई, क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार ने उसे कार्य करने का अवसर ही नहीं दिया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि ठेकेदार कंपनी ने 35 करोड़ रुपए की मांग की थी, जिसके बदले में वह विवाद को आगे नहीं बढ़ाने के लिए तैयार थी। लेकिन जब यह राशि नहीं दी गई, तो मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच गया। सीएम ने यह भी कहा कि इस अनियमितता में PWD विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता की संभावना है। उन्होंने सतर्कता जांच के तहत उनके कार्यों की भी जांच कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस जांच का परियोजना पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और इसे निर्धारित समय पर पूरा किया जाएगा।

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